मुख्य बिंदु
- Vande Mataram Row: इमरान मसूद का BJP पर पलटवार पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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Vande Mataram विवाद पर इमरान मसूद ने BJP के आरोपों का जवाब देते हुए 1937 के फैसले और सरदार पटेल के रुख का हवाला दिया।
Vande Mataram Row: इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् के केवल दो स्टैंजा गाने का फैसला ऐतिहासिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए लिया है। उनके अनुसार, 1937 में इस विषय पर गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह ली गई थी और सुभाष चंद्र बोस से भी विचार-विमर्श किया गया था। मसूद ने कहा कि वंदे मातरम् के दो स्टैंजा को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया था। उन्होंने बीजेपी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि नेहरू और टैगोर की बात से सहमति नहीं है, तो सरदार पटेल के फैसले का क्या होगा।
BJP के आरोपों पर इमरान मसूद का पलटवार
कांग्रेस सांसद ने बीजेपी के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिसमें पार्टी पर मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन और दो-राष्ट्र सिद्धांत को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया है। मसूद ने बीजेपी पर ही मुस्लिम लीग को समर्थन देने और उसे राजनीतिक ताकत देने का आरोप लगाया।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि देश के मुसलमानों को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चलने और अपनी बात रखने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए। मसूद ने कहा कि इस्लाम में केवल अल्लाह की इबादत की जा सकती है।
संसद में कानून को लेकर भी उठाया सवाल
वंदे मातरम् को लेकर संसद में कानून पारित किए जाने के सवाल पर मसूद ने कहा कि बीजेपी के पास संख्या बल है और इसी वजह से कानून पारित कराया गया। उन्होंने सवाल किया कि इससे मुसलमानों के अधिकारों से कैसे इनकार किया जा सकता है।मसूद ने बीजेपी पर राष्ट्रीय गीत को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी ने राष्ट्रीय गान के ऊपर राष्ट्रीय गीत को रखने की कोशिश की है।
Nitin Nabin ने कांग्रेस को बताया 'नई मुस्लिम लीग'
इससे पहले बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस के फैसले पर तीखा हमला किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस 1937 के प्रस्ताव का हवाला देकर वंदे मातरम् के केवल दो स्टैंजा गाने का फैसला कर रही है। उन्होंने कांग्रेस को 'नई मुस्लिम लीग' तक बताया।नितिन नवीन ने कहा कि वंदे मातरम् का अपमान उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने देश के लिए अपना जीवन बलिदान किया। उन्होंने कांग्रेस के फैसले को वोट बैंक की राजनीति से भी जोड़ा।
JP Nadda ने भी कांग्रेस पर साधा निशाना
बीजेपी सांसद जेपी नड्डा ने भी कांग्रेस के फैसले की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि 1937 में वंदे मातरम् को दो हिस्सों में बांटने का फैसला तुष्टिकरण की राजनीति का परिणाम था और इससे दो-राष्ट्र सिद्धांत को बल मिला।नड्डा ने कहा कि वंदे मातरम् के 150वें वर्ष में केंद्र सरकार ने इस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का फैसला किया है। उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रीय पहचान और अस्मिता के साथ समझौता करने का आरोप लगाया।वंदे मातरम् को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच जारी यह राजनीतिक बहस अब और तेज होती दिख रही है। एक ओर बीजेपी इसे राष्ट्रीय सम्मान और देशभक्ति से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस ऐतिहासिक फैसलों और धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला दे रही है।
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