नई दिल्ली: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन Ramdev Agrawal का अनुमान चर्चा में है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगले पांच वर्षों में निवेशकों को हर साल करीब 15 फीसदी तक का रिटर्न मिल सकता है। इस तरह लगातार अच्छा रिटर्न मिलने पर किसी निवेशक का पोर्टफोलियो पांच साल में लगभग दोगुना हो सकता है।हालांकि, यह एक बाजार विशेषज्ञ का अनुमान है, किसी निश्चित रिटर्न की गारंटी नहीं। शेयर बाजार में निवेश बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम के अधीन रहता है।
आर्थिक ग्रोथ से मिलेगा बाजार को सपोर्ट
रामदेव अग्रवाल ने अपने अनुमान के पीछे मुख्य रूप से भारत की आर्थिक वृद्धि और कंपनियों के मुनाफे में संभावित बढ़ोतरी को आधार बताया है। उनके अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले वर्षों में करीब 7.5 से 8.5 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ सकती है।इसके साथ ही कॉरपोरेट प्रॉफिट में भी करीब 13-14 फीसदी की वृद्धि की उम्मीद जताई गई है। आर्थिक गतिविधियों में तेजी और कंपनियों की कमाई बढ़ने का असर शेयर बाजार पर सकारात्मक रूप से पड़ सकता है। इन दोनों कारकों के चलते निवेशकों के पोर्टफोलियो में सालाना 12-14 फीसदी तक की वृद्धि की संभावना बन सकती है।
बाजार में 15-20 फीसदी तक तेजी की उम्मीद
अग्रवाल के मुताबिक बाजार में 15-20 फीसदी तक की तेजी देखने को मिल सकती है। उन्होंने निफ्टी के शेयरों के मौजूदा वैल्यूएशन का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, निफ्टी के शेयर औसतन अपनी कमाई के करीब 20 गुना मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं।अगर बाजार में करीब 15 फीसदी की वृद्धि बनी रहती है और वैल्यूएशन लगभग 17 गुना तक आता है, तो इसे बाजार के लिए सकारात्मक स्थिति माना जा सकता है। हालांकि, शेयर बाजार में वैल्यूएशन के साथ-साथ आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरें और वैश्विक घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
FII की बिकवाली जारी रहने का अनुमान
रामदेव अग्रवाल ने विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधियों पर भी अपनी राय रखी। उनका मानना है कि विदेशी निवेशक उन बाजारों की ओर अधिक आकर्षित होंगे, जहां कमाई और बाजार की गति मजबूत होगी।उन्होंने अमेरिका के साथ कोरिया और ताइवान जैसे एशियाई बाजारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां फिलहाल भारत की तुलना में बेहतर मोमेंटम दिखाई दे रहा है। इसके अलावा कैपिटल गेन्स टैक्स भी विदेशी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर सकता है।अग्रवाल के मुताबिक आगे भी भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली देखने को मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल FII की बिकवाली पर कुछ रोक लगना बाजार के लिए राहत की बात है।
रुपये की कमजोरी बनी बड़ी चिंता
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे रुपये की कमजोरी को भी उन्होंने एक महत्वपूर्ण कारण बताया। उनका कहना है कि विदेशी निवेशक डॉलर में निवेश करते हैं, जबकि भारत में टैक्स और अन्य गणनाएं रुपये में होती हैं।ऐसे में अगर निवेश से मिलने वाला मुनाफा रुपये से डॉलर में बदलते समय मुद्रा विनिमय दर के कारण कम हो जाता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार का आकर्षण प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि रुपये की स्थिरता आने वाले समय में बाजार और विदेशी निवेश के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी रह सकती है।
नोट: यह लेख दिए गए कंटेंट पर आधारित है। इसे निवेश सलाह न मानें। शेयर बाजार में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना उचित है।
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