मुख्य बिंदु
- Rahul Gandhi: OBC को लेकर Gen Z आंदोलन पर बड़ा बयान पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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Rahul Gandhi ने जातीय जनगणना को लेकर केंद्र पर निशाना साधा और सवाल किया कि अगर OBC समाज भी Gen Z की तरह सड़कों पर उतर आया तो सरकार क्या करेगी
नई दिल्ली: जातीय जनगणना का मुद्दा एक बार फिर देश की राजनीति में चर्चा के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को OBC विभाग के एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए Gen Z के हालिया आंदोलनों का उदाहरण दिया।राहुल गांधी ने सवाल किया कि अगर OBC समाज भी Gen Z की तरह अपने अधिकारों को लेकर सड़कों पर उतर आया तो सरकार क्या करेगी। उन्होंने कहा कि OBC आबादी का आकार काफी बड़ा है और अगर यह समुदाय अपने अधिकारों के लिए व्यापक स्तर पर लामबंद होता है तो सरकार के सामने उसकी मांगों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
जातीय जनगणना पर राहुल गांधी का सरकार पर हमला
राहुल गांधी ने दावा किया कि केंद्र सरकार पहले जातीय जनगणना के पक्ष में नहीं थी। उनके मुताबिक, जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसकी मांग कर रहे थे, तब मांग उठाने वालों पर कई तरह के आरोप लगाए गए।कांग्रेस नेता ने कहा कि बाद में बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच सरकार ने आगामी जनगणना में जातीय गणना को शामिल करने का फैसला किया। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जातीय गणना में OBC की वास्तविक आबादी और प्रतिनिधित्व को कितनी प्रभावी तरीके से दर्ज किया जाएगा।राहुल गांधी लंबे समय से जातीय जनगणना को सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व से जोड़ते रहे हैं।
Gen Z आंदोलन का दिया उदाहरण
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने हाल के Gen Z आंदोलनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने मुद्दों को लेकर सड़कों पर आए तो सरकार को उन पर ध्यान देना पड़ा।इसी संदर्भ में उन्होंने OBC समाज को लेकर सवाल खड़ा किया। उनका कहना था कि यदि बड़ी संख्या में OBC समुदाय भी अपने अधिकारों और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर सड़कों पर उतरता है, तो केंद्र सरकार पर बड़ा राजनीतिक दबाव बन सकता है।राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय आया है जब जातीय जनगणना को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
OBC प्रतिनिधित्व पर कांग्रेस का जोर
कांग्रेस का तर्क है कि देश में अलग-अलग सामाजिक वर्गों की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आने के बाद ही प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी की सही तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।राहुल गांधी भी कई मौकों पर जातीय जनगणना को OBC प्रतिनिधित्व से जोड़ चुके हैं। उनका कहना है कि केवल जातीय गणना की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आंकड़ों को सही तरीके से दर्ज करना भी जरूरी है।उनके ताजा बयान में भी इसी राजनीतिक मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए OBC की आबादी और उसके प्रतिनिधित्व पर जोर दिया गया।
सरकार ने जातीय गणना को लेकर क्या कहा?
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 में घोषणा की थी कि जनगणना 2027 में जातीय गणना को शामिल किया जाएगा। सरकार के मुताबिक, जाति से जुड़ी जानकारी जनगणना के दूसरे चरण में दर्ज की जाएगी।गृह मंत्रालय ने फरवरी 2026 में भी स्पष्ट किया था कि जातीय जानकारी जनसंख्या गणना के दूसरे चरण में शामिल होगी। इसके लिए संबंधित सवालों को अंतिम रूप देने और अधिसूचित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।इस तरह सरकार का कहना है कि जातीय गणना को आगामी जनगणना का हिस्सा बनाने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच बढ़ सकती है सियासी जंग
जातीय जनगणना को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। कांग्रेस इसे OBC की आबादी, सामाजिक न्याय और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी सरकार द्वारा लिए गए फैसले को अपनी पहल बता रही है।राहुल गांधी का ताजा Gen Z वाला बयान इस बहस को आंदोलन और जनदबाव के नए एंगल से जोड़ता है। ऐसे में जनगणना 2027 की तैयारियों के साथ जातीय आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।
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