मुख्य बिंदु
- LPG Price Hike: OMCs की अंडर-रिकवरी ₹60,000 करोड़ के पार, सरकार के 3 बड़े कदम पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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LPG Price Hike: महंगी LPG के बीच सरकार ने सप्लाई, बुकिंग और सब्सिडी को लेकर उठाए कदम!
LPG Price Hike: अंतरराष्ट्रीय LPG बाजार में कीमतों में तेजी के बीच भारत में घरेलू रसोई गैस की लागत को लेकर दबाव बढ़ा है। सरकार के अनुसार, घरेलू LPG की संचयी अंडर-रिकवरी वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक करीब ₹60,000 करोड़ पहुंच गई थी, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को इसके लिए ₹30,000 करोड़ के मुआवजे की मंजूरी दी गई है। अंडर-रिकवरी का मतलब अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की वास्तविक लागत और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए नियंत्रित खुदरा कीमत के बीच का अंतर है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर कंपनियों के तत्काल नकद घाटे के बराबर नहीं माना जाता।
Saudi CP बढ़ने से क्यों बढ़ी LPG की लागत?
भारत अपनी LPG जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने का सीधा असर आयात लागत और तेल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ता है। सरकार के अनुसार, 2026 में Saudi CP बेंचमार्क में तेज बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में आपूर्ति संबंधी व्यवधानों के कारण LPG की लागत बढ़ी। सरकार ने बताया कि फरवरी से जून 2026 के बीच Saudi CP में करीब 46% की वृद्धि हुई, जिससे 14.2 किलोग्राम घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति लागत ₹1,600 से अधिक हो गई। ऐसी स्थिति में यदि घरेलू खुदरा कीमतों में लागत के अनुपात में तुरंत बदलाव नहीं होता, तो OMCs पर अंडर-रिकवरी का दबाव बढ़ता है।
दिल्ली में LPG सिलेंडर की कीमत कितनी है?
वर्तमान सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में सामान्य उपभोक्ता के लिए 14.2 किलोग्राम घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत ₹942 है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए प्रभावी कीमत ₹642 है। सरकार के अनुसार, PMUY के तहत उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर ₹300 की अतिरिक्त सहायता मिलती है। यह सहायता घरेलू LPG की लागत और उपभोक्ता पर पड़ने वाले बोझ के बीच अंतर को कम करने के लिए दी जाती है।
LPG सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार के कदम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव के बीच सरकार ने घरेलू LPG की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं।
1. घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने पर जोर
सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल परिसरों में LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए। संकट के दौरान C3-C4 स्ट्रीम को LPG उत्पादन की ओर मोड़ने जैसी व्यवस्थाएं भी की गईं। सरकार ने घरेलू LPG उपभोक्ताओं की आपूर्ति को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसके अलावा अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को गैर-घरेलू LPG की आपूर्ति में प्राथमिकता दी गई।
2. बुकिंग अंतर बढ़ाया गया
LPG की पैनिक बुकिंग और अनावश्यक मांग को नियंत्रित करने के लिए शहरी क्षेत्रों में दो रिफिल बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह अंतर 45 दिन तक है। हालांकि, मार्च 2026 में सरकार ने स्पष्ट किया था कि सोशल मीडिया पर बताए जा रहे अलग-अलग नए नियम सही नहीं हैं और आधिकारिक बुकिंग व्यवस्था को ही मान्य माना जाए।
3. सब्सिडी के लिए Biometric Aadhaar Authentication
सरकार ने सब्सिडी वाले घरेलू LPG रिफिल के लिए 1 अक्टूबर 2026 से Biometric Aadhaar Authentication (BAA) अनिवार्य करने की घोषणा की है। 19 सितंबर 2026 तक 27.43 करोड़ यानी 89.9% सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ता अपना बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा कर चुके थे। प्रमाणीकरण डिलीवरी के समय, LPG डिस्ट्रीब्यूटर के शोरूम या संबंधित OMC के मोबाइल ऐप के जरिए किया जा सकता है। सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य सब्सिडी वाले LPG की पहुंच वास्तविक और पात्र उपभोक्ताओं तक सुनिश्चित करना तथा डुप्लीकेट या अयोग्य कनेक्शनों को हटाना है।
आगे क्या हो सकता है?
LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर OMCs की अंडर-रिकवरी और सरकार के मुआवजा एवं सब्सिडी खर्च पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, पश्चिम एशिया में आपूर्ति व्यवधान जारी रहने पर आयात लागत भी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल सरकार का फोकस घरेलू LPG की उपलब्धता बनाए रखने, उत्पादन बढ़ाने, आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और सब्सिडी को लक्षित तरीके से पहुंचाने पर है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG की कीमतों पर आगे का दबाव मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय कीमतों, आपूर्ति स्थिति और सरकारी समर्थन की नीति पर निर्भर करेगा।
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