मुख्य बिंदु
- Ganesh Ji Aarti: गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें बप्पा की आरती पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है। गणपति को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर पूजा के बाद भगवान गणेश की आरती करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ गणेश जी की आरती करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥
गणेश चतुर्थी के दिन पूजा के बाद भक्त भगवान गणेश को मोदक और लड्डू समेत उनके प्रिय भोग अर्पित कर आरती कर सकते हैं। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा के साथ गणपति बप्पा का स्मरण करने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है।
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