मुख्य बिंदु
- बिहार में बाढ़: क्या पटना को बचाएगी प्रोटेक्शन वॉल? पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
- नीचे पूरा विस्तृत विवरण पढ़ें।
बिहार में बाढ़ की स्थिति: पटना को बचाने वाली ढाल का क्या है हाल?
बिहार में बाढ़ की स्थिति: बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। राज्य के 12 जिलों में बाढ़ का असर है और राजधानी पटना पर भी गंगा समेत कई नदियों का खतरा बढ़ गया है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ पटना के निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है। ऐसे में करीब पांच दशक पहले बनी पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल एक बार फिर चर्चा में है। पटना जिला प्रशासन ने गंगा का पानी शहर में प्रवेश करने से रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम तेज कर दिए हैं। प्रोटेक्शन वॉल पर बने सभी 108 रास्तों को बंद कर दिया गया है। जहां लीकेज मिला, उसे भी बंद कराया गया है। कुर्जी इलाके में उन नालों को भी बंद किया गया है, जिनके जरिए गंगा का पानी शहर में प्रवेश कर सकता था।
1975 की भीषण बाढ़ के बाद बनी थी प्रोटेक्शन वॉल
पटना ने वर्ष 1975 में भीषण बाढ़ का सामना किया था। इसके बाद राजधानी को गंगा के संभावित उफान से बचाने के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने का फैसला लिया गया। इसी क्रम में वर्ष 1976 में पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल का निर्माण कराया गया। करीब पांच दशक पुरानी यह सुरक्षा दीवार आज भी पटना के प्रमुख बाढ़ सुरक्षा ढांचे का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य गंगा के बाढ़ के पानी को शहर के बड़े हिस्से में प्रवेश करने से रोकना है।
दानापुर से रानी घाट तक फैली है सुरक्षा व्यवस्था
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पटना की यह बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था करीब 24 किलोमीटर लंबी है और इसका विस्तार दानापुर से रानी घाट तक बताया जाता है हालांकि, प्रोटेक्शन वॉल पटना के हर इलाके को बाढ़ से पूरी तरह सुरक्षित नहीं करती। दीवार के बाहर और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को गंगा का जलस्तर बढ़ने पर सीधा खतरा बना रहता है। वर्ष 2013 में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने के दौरान प्रोटेक्शन वॉल के बाहर रहने वाले लोगों को प्रशासन ने सतर्क किया था।
सिर्फ दीवार नहीं, कटाव से बचाव भी जरूरी
बाढ़ के दौरान केवल नदी का जलस्तर बढ़ना ही चिंता का विषय नहीं है। नदी का कटाव भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है। गंगा की तेज धारा यदि प्रोटेक्शन वॉल के आसपास की जमीन को कमजोर करती है तो इससे पूरी सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से समय-समय पर गंगा किनारे कटावरोधी और तट संरक्षण के काम किए जाते रहे हैं। वर्ष 2014 में जल संसाधन विभाग ने नासरीगंज यानी रामजीचक घाट से दीघा नहर तक करीब 1.12 किलोमीटर क्षेत्र में गंगा के किनारे ढलान और तट को मजबूत करने का काम शुरू किया था।
गंगा खतरे के निशान से काफी ऊपर
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पटना के आसपास गंगा और पुनपुन नदी का जलस्तर चिंता बढ़ाने वाला है। मनेर में गंगा खतरे के निशान से 1.50 मीटर, दीघा घाट पर 1.23 मीटर, गांधी घाट पर 1.76 मीटर और हाथीदह में 1.48 मीटर ऊपर बह रही है। वहीं, श्रीपालपुर में पुनपुन नदी खतरे के निशान से 2.56 मीटर ऊपर बताई गई है। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण पटना के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है।
पटना के कई इलाकों में घुसा बाढ़ का पानी
गंगा का पानी दीघा घाट अंडरपास के नीचे तक पहुंच गया है। गायघाट-दीदारगंज सड़क भी पानी में डूब गई है। इसके अलावा बिंद टोली, एलसीटी घाट, गांधी घाट, महावीर घाट और पटना सिटी के कई इलाकों में गंगा का पानी प्रवेश कर चुका है। कई स्थानों पर कमर तक पानी भरने की स्थिति बताई जा रही है। इससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और प्रशासन को राहत एवं बचाव व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना पड़ रहा है।
प्रशासन ने बंद किए प्रोटेक्शन वॉल के 108 रास्ते
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा और नगर आयुक्त यशपाल मीणा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने दीघा घाट, बिंद टोली, एलसीटी घाट, गोसाईं टोला और पूरे पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल क्षेत्र का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने शहर में गंगा का पानी प्रवेश करने से रोकने के लिए सभी जरूरी सुरक्षा उपाय तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए। प्रोटेक्शन वॉल में बने सभी 108 रास्तों को बंद कराया गया। वहीं, स्लुइस गेटों के निरीक्षण के दौरान कुछ स्थानों पर सीपेज मिलने के बाद लीकेज बंद कराया गया। सभी 13 स्लुइस गेटों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
नालों के जरिए शहर में पानी आने से रोकने की तैयारी
प्रशासन ने सभी ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों को पूरी क्षमता से चालू रखने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर शहर से पानी की तत्काल निकासी सुनिश्चित करने को कहा गया है। पाटलिपुत्र कॉलोनी और आसपास के इलाकों में पानी के संभावित प्रवेश को रोकने के लिए भी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। सदाकत आश्रम के पास नाले के रास्ते गंगा का पानी शहर में आने की आशंका को देखते हुए जल संसाधन विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम को नाला बंद करने का निर्देश दिया गया है। नगर निगम, जल संसाधन विभाग और बुडको के अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर 24 घंटे निगरानी रखने को कहा गया है।
क्या पांच दशक पुरानी दीवार पटना को बचा पाएगी?
पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल ने पिछले कई दशकों में राजधानी के बड़े हिस्से को गंगा की बाढ़ से सुरक्षा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन करीब पांच दशक पुरानी इस दीवार को पटना का पूर्ण सुरक्षा कवच मानना सही नहीं होगा। बदलती नदी की धारा, कटाव, शहरी विस्तार, गंगा किनारे बढ़ता निर्माण, अत्यधिक बारिश और जल निकासी की समस्याएं नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। इसलिए पटना की सुरक्षा केवल प्रोटेक्शन वॉल पर निर्भर नहीं है। स्लुइस गेट, ड्रेनेज सिस्टम, पंपिंग स्टेशन, कटावरोधी कार्य और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी भी उतनी ही जरूरी है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता गंगा के पानी को प्रोटेक्शन वॉल और नालों के रास्ते शहर में प्रवेश करने से रोकना है। आने वाले दिनों में गंगा के जलस्तर में होने वाला बदलाव यह तय करेगा कि पटना की यह पुरानी सुरक्षा व्यवस्था मौजूदा बाढ़ के दबाव का सामना कितनी मजबूती से कर पाती है।
टिप्पणी लिखें
बातचीत में शामिल होने के लिए कृपया साइन इन करें।
टिप्पणी करने के लिए साइन इन करेंखाता नहीं है? साइन अप करें