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Teacher’s Day Special: एक रिजेक्शन से शुरू हुई कहानी, गुरु अब्बास जबलपुरवाला ने ऐसे संवारा सौरव बोस का करियर

सौरव बोस ने बताया कैसे अब्बास जबलपुरवाला के मार्गदर्शन ने उन्हें बेहतर लीडर और उद्यमी बनने की राह दिखाई।

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Teacher’s Day Special: एक रिजेक्शन से शुरू हुई कहानी, गुरु अब्बास जबलपुरवाला ने ऐसे संवारा सौरव बोस का करियर • Source: TMINS
Source : tmins.in

मुख्य बिंदु

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किसी के करियर को आगे बढ़ाने में मेहनत और प्रतिभा की अपनी भूमिका होती है, लेकिन सही समय पर मिला मार्गदर्शन कई बार पूरी दिशा बदल देता है। सौरव बोस की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनके पेशेवर सफर में अब्बास जबलपुरवाला का योगदान एक शिक्षक और मार्गदर्शक से कहीं आगे रहा।

सितंबर 2006 में सौरव बोस की अब्बास जबलपुरवाला से पहली मुलाकात कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित सिटी सेंटर मॉल में एक नौकरी के साक्षात्कार के दौरान हुई थी। उस समय भारत में फैमिली एंटरटेनमेंट सेंटर की अवधारणा अभी शुरुआती दौर में थी। ऐसे केंद्रों को अक्सर केवल स्थानीय वीडियो गेम पार्लर के रूप में देखा जाता था।

वहीं टाइमजोन भारत में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था। सौरव के मुताबिक, उस दौर में अब्बास जबलपुरवाला और उनकी टीम का उद्देश्य मनोरंजन केंद्रों को लेकर लोगों की सोच बदलना और ग्राहकों के लिए एक अलग तरह का अनुभव तैयार करना था।

लेकिन पहली मुलाकात सौरव के पक्ष में नहीं रही।

उन्हें नौकरी के लिए चुनने के बजाय अस्वीकार कर दिया गया।

पहली असफलता के बाद आया जिंदगी का दूसरा बड़ा पड़ाव

उस समय सौरव का ध्यान अपने निजी जीवन के एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव पर भी था। वह अपनी प्रेमिका प्रियंका से शादी की तैयारी कर रहे थे। दोनों ने 30 नवंबर 2006 को शादी की।

शादी के कुछ ही समय बाद सौरव की जिंदगी में एक ऐसा संयोग आया, जिसने उनके पेशेवर भविष्य की दिशा बदल दी।

दिसंबर के मध्य में कोलकाता की एक ठंडी दोपहर के दौरान, शादी के बाद मिली छुट्टियों के बीच सौरव कुछ खाने के लिए मशहूर कैफे द कुकी जार पहुंचे। वहां उनकी अचानक फिर अब्बास जबलपुरवाला से मुलाकात हो गई।

यह महज एक संयोग था, लेकिन बातचीत आगे बढ़ी तो वहीं अनौपचारिक तौर पर साक्षात्कार भी हो गया।

इस बार परिणाम अलग था।

सौरव को सिटी सेंटर मॉल स्थित टाइमजोन केंद्र में मैनेजर के पद पर नियुक्त कर लिया गया।

यहीं से उनके करियर के उस अध्याय की शुरुआत हुई, जिसने आने वाले वर्षों में उनके पेशेवर सोच और नेतृत्व शैली को गहराई से प्रभावित किया।

सिर्फ नौकरी नहीं, अनुभव तैयार करना सीखा

टाइमजोन में शुरुआती वर्षों के दौरान सौरव और उनकी टीम के सामने केवल मनोरंजन केंद्र चलाने की चुनौती नहीं थी। उस समय भारत में यह उद्योग खुद अपनी पहचान बना रहा था।

टीम का प्रयास था कि ग्राहक सिर्फ खेल खेलने या मनोरंजन के लिए केंद्र तक न आएं, बल्कि वहां से एक यादगार अनुभव लेकर जाएं।

सौरव के अनुसार, अब्बास का नेतृत्व इस प्रक्रिया में बेहद महत्वपूर्ण था। वह नए और अलग विचारों को प्रोत्साहित करते थे और टीम के सदस्यों को उन्हें लागू करने की स्वतंत्रता भी देते थे।

यह स्वतंत्रता केवल सफलता तक सीमित नहीं थी। अगर कोई प्रयोग अपेक्षा के मुताबिक काम नहीं करता था, तो भी टीम को सीखने का अवसर मिलता था।

एक सीख जो आज भी याद है

अब्बास से मिली कई सीखों में से एक बात सौरव के मन में आज तक दर्ज है।

उनकी सलाह थी कि गलती करना अपराध नहीं है, लेकिन उसी गलती को दोहराना जरूर समस्या है।

सौरव के लिए यह केवल कार्यस्थल की सलाह नहीं थी। यह उस सोच का हिस्सा बन गई, जिसके आधार पर उन्होंने आगे चलकर फैसले लेना और असफलताओं से सीखना जारी रखा।

उनके मुताबिक, जब कभी कोई गलती हुई तो अब्बास ने टीम के सामने उनका बचाव किया, लेकिन सफलता मिलने पर उसका श्रेय टीम के सदस्यों को दिया।

यही नेतृत्व शैली सौरव के लिए सबसे बड़ी सीखों में से एक बनी।

आठ साल की सीख ने बनाया उद्यमी

सौरव ने करीब आठ साल अब्बास के मार्गदर्शन में काम किया। इस दौरान उन्होंने टीम संभालने, निर्णय लेने, ग्राहकों के अनुभव को समझने और कारोबार को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने की बारीकियां सीखीं।

बाद में जब सौरव ने अपना उद्यम शुरू किया तो यही अनुभव उनके लिए आधार बना।

आज वह High Volt Bowling & Gaming के सह-संस्थापक हैं। मनोरंजन और गेमिंग के क्षेत्र में अपना कारोबार खड़ा करने के पीछे जिन शुरुआती अनुभवों को वह महत्वपूर्ण मानते हैं, उनमें टाइमजोन का दौर और अब्बास से मिली सीख प्रमुख है।

उनके लिए यह रिश्ता केवल एक वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारी का नहीं था। यह एक ऐसे गुरु और शिष्य का रिश्ता बन गया, जिसमें पेशेवर मार्गदर्शन के साथ व्यक्तिगत विश्वास भी शामिल था।

दो दशक बाद भी कायम है सम्मान

सितंबर 2006 में शुरू हुआ यह सफर अब दो दशक पूरा कर चुका है। सौरव के लिए यह समय पीछे मुड़कर देखने और यह समझने का अवसर भी है कि उनके करियर की नींव किन लोगों ने मजबूत की।

पहली मुलाकात में मिली असफलता के बाद उसी व्यक्ति से दोबारा संयोग से मिलना और फिर उनके मार्गदर्शन में आठ वर्षों तक काम करना उनके जीवन की ऐसी घटनाओं में शामिल है, जिन्हें वह आज भी विशेष महत्व देते हैं।

उनके मुताबिक, अपने करियर में अनुभव हासिल करना जरूरी है, लेकिन उस अनुभव को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक मिलना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

शिक्षक दिवस पर गुरु को समर्पित संदेश

शिक्षक दिवस के अवसर पर सौरव बोस ने अब्बास जबलपुरवाला के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने उन्हें अपने जीवन में माता-पिता के बाद सबसे अधिक सम्मान देने वाले लोगों में शामिल बताया।

उनका कहना है कि आज वह अनुभव निर्माण, टीम नेतृत्व और अपना कारोबार चलाने के बारे में जितना कुछ समझते हैं, उसकी नींव उन वर्षों में पड़ी, जब उन्होंने अब्बास के साथ काम किया।

सौरव का यह संदेश सिर्फ एक शिक्षक को धन्यवाद देने तक सीमित नहीं है। यह उस रिश्ते की कहानी भी है, जिसमें एक शुरुआती असफलता के बाद मिला दूसरा मौका आगे चलकर जीवन बदलने वाली पेशेवर यात्रा की शुरुआत बन गया।

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Nitin

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प्रकाशित तिथि: 04 Sep 2026
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