Ganesh Chaturthi 2026 के मौके पर देशभर में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की तैयारियां चल रही हैं। गणपति के अनेक प्रसिद्ध मंदिरों में जयपुर का नाहर वाले गणपति मंदिर अपनी अलग धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के लिए जाना जाता है। ब्रह्मपुरी क्षेत्र में नाहरगढ़ की पहाड़ियों के पास स्थित इस मंदिर में गणेश चतुर्थी से पहले विशेष सिंजारा उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान भगवान गणेश का विशेष श्रृंगार किया जाता है और मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। खास बात यह है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा की सूंड दाईं ओर मानी जाती है। इसी वजह से मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था देखने को मिलती है।
नाहर वाले गणपति मंदिर की खास मान्यता
जयपुर का यह मंदिर स्थानीय लोगों के बीच नाहर वाले गणपति के नाम से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां विराजमान गणपति भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। गणेश चतुर्थी के दौरान मंदिर में विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। दाईं ओर सूंड वाले गणेश को लेकर भी भक्तों में विशेष श्रद्धा है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में गणपति की सूंड की दिशा को अलग-अलग प्रतीकों से जोड़ा जाता है। दाईं सूंड वाले गणेश को विशेष रूप से जागृत और शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है, इसलिए ऐसे मंदिरों में पूजा के दौरान नियमों और विधि का विशेष ध्यान रखने की परंपरा बताई जाती है।
गणेश चतुर्थी से पहले मनाया जाता है सिंजारा उत्सव
इस मंदिर की सबसे खास परंपराओं में सिंजारा उत्सव शामिल है। गणेश चतुर्थी से एक दिन पहले मंदिर में यह उत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है सिंजारा उत्सव के अवसर पर भगवान गणेश को विशेष रूप से सजाया जाता है। बप्पा का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और मंदिर परिसर को भी भव्य तरीके से सजाया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं।सिंजारा उत्सव के कारण गणेश चतुर्थी से पहले ही मंदिर में उत्सव का माहौल बन जाता है।
दूर-दूर से मेहंदी लेने आते हैं श्रद्धालु
नाहर वाले गणपति मंदिर की एक और अनोखी परंपरा मेहंदी और सिंदूर से जुड़ी हुई है। मंदिर के महंत के अनुसार राजस्थान के कई मंदिरों में लंबे समय से मेहंदी और सिंदूर बांटने की परंपरा चली आ रही है। जयपुर के कुछ प्रमुख गणेश मंदिरों में भी यह परंपरा विशेष रूप से देखने को मिलती है। नाहर वाले गणपति मंदिर में सिंजारा उत्सव के दौरान श्रद्धालु मेहंदी लेने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं। भक्त इसे भगवान गणेश के आशीर्वाद और सौभाग्य से जोड़कर देखते हैं। महिलाओं के बीच इस परंपरा को लेकर विशेष उत्साह रहता है।
गणेश चतुर्थी पर बढ़ जाती है भक्तों की भीड़
गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो जाता है। भक्त भगवान गणेश को मोदक, लड्डू, दूर्वा और फूल अर्पित कर पूजा करते हैं। मंदिर में विशेष आरती और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। गणेश उत्सव के दौरान जयपुर के इस प्राचीन मंदिर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिलता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ राजस्थान और दूसरे शहरों से आने वाले भक्त भी यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। Ganesh Chaturthi 2026 के अवसर पर नाहर वाले गणपति मंदिर की यह अनोखी परंपरा और दाईं ओर सूंड वाले गणेश का स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। सिंजारा उत्सव, विशेष श्रृंगार और मेहंदी बांटने की परंपरा इस मंदिर को जयपुर के अन्य गणेश मंदिरों से अलग पहचान देती है।
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