मुख्य बिंदु
- Dhanteras 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त, खरीदारी का समय और पूजा विधि पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
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धनतेरस पर जानें धन-समृद्धि के लिए करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और खरीदारी से जुड़ी खास बातें !
Dhanteras 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त, खरीदारी का समय और जानें पूजा विधि
धनतेरस का त्योहार आज 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को पूरे देश में मनाया जा रहा है। दीपावली से पहले आने वाले इस पर्व के साथ ही पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होती है। धनतेरस को धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस पर शुभ वस्तुओं की खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।सुबह से ही बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। लोग सोना-चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन, झाड़ू, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीद रहे हैं। वहीं, शाम को घरों में दीपक जलाकर भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा की जाएगी।
धनतेरस 2026 पर पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। दिल्ली में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:01 बजे से रात 7:58 बजे तक बताया गया है। इस दौरान भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जा सकती है।अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और स्थानीय पंचांग के आधार पर पूजा के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना उचित रहेगा।
सोना-चांदी खरीदने का शुभ समय
धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना शुभ माना जाता है। दिल्ली के लिए बताए गए चौघड़िया मुहूर्त के अनुसार खरीदारी के शुभ समय इस प्रकार हैं:
सुबह 7:54 से 9:16 बजे तक लाभ चौघड़िया।
सुबह 9:16 से 10:39 बजे तक अमृत चौघड़िया।
दोपहर 12:01 से 1:24 बजे तक शुभ चौघड़िया।
शाम 4:09 से 5:31 बजे तक चर चौघड़िया।
रात 8:46 से 10:24 बजे तक लाभ चौघड़िया।
इसके अलावा, 7 नवंबर की सुबह तक भी सोना खरीदने का शुभ समय बताया गया है। खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और बजट का ध्यान रखना चाहिए।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर सोना-चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन, झाड़ू, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा साबुत धनिया और गोमती चक्र खरीदने की भी परंपरा है।अगर आपका बजट ज्यादा नहीं है तो महंगे आभूषण खरीदना जरूरी नहीं है। आप चांदी का छोटा सिक्का, पीतल का दीपक, तांबे का लोटा या घर के काम आने वाला कोई नया बर्तन भी खरीद सकते हैं।वहीं, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन लोहे की वस्तुएं, काले रंग का सामान, चाकू, कैंची और प्लास्टिक की चीजें खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं, कोई अनिवार्य नियम नहीं।
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि और मां लक्ष्मी की पूजा विधि
धनतेरस की शाम सबसे पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। दीपक जलाकर फूल, अक्षत, रोली, धूप, नैवेद्य और मिठाई अर्पित करें।भगवान धन्वंतरि की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:ॐ नमो भगवते धन्वंतरये नमः।मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप किया जाता है। अंत में भगवान की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
यम दीपदान का क्या है महत्व?
धनतेरस पर यम दीपदान की भी विशेष परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन शाम को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मिट्टी का दीपक जलाया जाता है। इसमें सरसों का तेल और बाती का इस्तेमाल किया जाता है।कहा जाता है कि यमराज के निमित्त दीपदान करने से परिवार के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है। कई घरों में धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है।
धनतेरस से शुरू होगा पांच दिवसीय दीपोत्सव
धनतेरस के बाद 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली और मुख्य दीपावली मनाई जाएगी। इसके बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाई दूज का त्योहार आएगा।धनतेरस का पर्व केवल धन और खरीदारी तक सीमित नहीं है। यह अच्छे स्वास्थ्य, सुख-शांति और नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। भगवान धन्वंतरि की पूजा के साथ लोग परिवार के निरोगी जीवन की कामना करते हैं। ऐसे में इस धनतेरस पर अपनी क्षमता के अनुसार खरीदारी करें और पूरे परिवार के साथ श्रद्धा और उत्साह से त्योहार मनाएं।
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