मुख्य बिंदु
- National Handloom Day: PM Modi ने की खास अपील पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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National Handloom Day 2026: PM Modi ने देशवासियों से की हैंडलूम खरीदने और बुनकरों का समर्थन करने की अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) 2026 के अवसर पर देशवासियों से पूरे उत्साह के साथ इस दिन को मनाने और भारत की समृद्ध हथकरघा विरासत को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने लोगों से कम से कम एक हैंडलूम उत्पाद खरीदने, उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने और देश के बुनकरों एवं कारीगरों के कौशल को वैश्विक पहचान दिलाने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने एक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा कि 7 अगस्त 1905 को भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। उस समय देश के हर वर्ग के लोगों ने एकजुट होकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हमें उसी स्वदेशी भावना की याद दिलाता है और भारतीय हथकरघा उद्योग को मजबूत बनाने का अवसर देता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के लाखों गरीब बुनकर और कारीगर अपने हाथों से बेहतरीन कपड़े तैयार करते हैं। इन परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करना आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे स्थानीय हथकरघा उत्पादों को प्राथमिकता दें और बुनकरों की मेहनत को सम्मान दें।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कम से कम एक हैंडलूम उत्पाद खरीदें, उसका वीडियो बनाएं और #NationalHandloomDay हैशटैग के साथ सोशल मीडिया पर साझा करें। इससे भारत के कारीगरों की कला और शिल्प को देश ही नहीं, दुनिया भर में पहचान मिलेगी और उनके उत्पादों को नया बाजार भी मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में देश के सभी बुनकरों और कारीगरों को उनकी कौशल, रचनात्मकता और समर्पण के लिए नमन किया। उन्होंने कहा कि इन शिल्पकारों ने पीढ़ियों से भारत की सांस्कृतिक परंपराओं को न केवल संरक्षित किया है, बल्कि उन्हें और समृद्ध भी बनाया है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार भविष्य में भी हथकरघा क्षेत्र को हरसंभव सहयोग देती रहेगी। उनके अनुसार, यह क्षेत्र ग्रामीण सशक्तिकरण, महिला नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हर वर्ष 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा का सम्मान करना, बुनकरों के योगदान को पहचान देना और लोगों को स्वदेशी एवं हस्तनिर्मित उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित करना है।
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