पूर्व क्रिकेटर ने कहा- पंजाब में खेल और नशे के मुद्दे उठाए, लेकिन भगवंत मान ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद रह चुके हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की वजह पर खुलकर बात की है। उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। हरभजन सिंह के मुताबिक, पंजाब में खेलों को बढ़ावा देने और नशे की समस्या को लेकर उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी चिंताएं रखीं, लेकिन उनकी बातों को अपेक्षित तवज्जो नहीं मिली।हरभजन सिंह ने PTI मुख्यालय में एक पॉडकास्ट के दौरान अपने राजनीतिक सफर और AAP से अलग होने के फैसले को लेकर कई बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि राजनीति में आने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य पंजाब और देश में खेलों को बढ़ावा देना था।
2022 में AAP ने भेजा था राज्यसभा
हरभजन सिंह ने 2022 में आम आदमी पार्टी के जरिए राज्यसभा में प्रवेश किया था। उस समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि राजनीति में उनकी प्राथमिकता खेलों से जुड़े मुद्दों को उठाना और पंजाब में खेलों के विकास के लिए काम करना है।उनके मुताबिक, आम आदमी पार्टी में शामिल होने से पहले भी उनका फोकस खेलों पर ही था। वह चाहते थे कि पंजाब में खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिलें और राज्य से नई खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिले।
भगवंत मान पर क्या आरोप लगाए?
हरभजन सिंह ने कहा कि उन्होंने पंजाब में खेलों की स्थिति और नशे की बढ़ती समस्या को लेकर अपनी चिंताएं लगातार सामने रखीं। उनका दावा है कि उन्होंने पार्टी के भीतर इन मुद्दों पर आवाज उठाई, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।हरभजन के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए खुद संपर्क किया था। लेकिन उनका उद्देश्य राजनीतिक पद हासिल करना नहीं, बल्कि खेलों से जुड़े मुद्दों पर काम करना था।
उन्होंने बताया कि उन्होंने नेतृत्व के सामने अपना विजन रखा था और कहा था कि वह पंजाब के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर खेलों को बढ़ावा देना चाहते हैं। हालांकि, उन्हें लगा कि उनके विचारों और सुझावों को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा है।
खेलों के लिए काम करना चाहते थे हरभजन
हरभजन सिंह ने कहा कि राजनीति में आने के बाद भी उनका लक्ष्य खेलों को बढ़ावा देना ही रहा। वह चाहते थे कि पंजाब में खिलाड़ियों के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो और युवाओं को खेलों के जरिए आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलें।उनके मुताबिक, पार्टी के मंच पर उन्होंने अपने खेल संबंधी विचार रखे, लेकिन उन्हें उम्मीद के मुताबिक अमल में नहीं लाया गया। धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि जिस उद्देश्य से उन्होंने राजनीति में कदम रखा था, उसे पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
AAP छोड़कर BJP में क्यों गए?
हरभजन सिंह ने इस साल अप्रैल में AAP छोड़ने के बाद BJP का दामन थामा। उनके साथ पार्टी के कई अन्य सांसदों के भी BJP में जाने की बात सामने आई थी।
हरभजन के बयान से संकेत मिलता है कि AAP से अलग होने के पीछे सिर्फ राजनीतिक समीकरण नहीं, बल्कि उनके अनुसार खेलों की अनदेखी और पंजाब में नशे की समस्या पर पर्याप्त कार्रवाई न होने को लेकर असंतोष भी एक महत्वपूर्ण वजह थी।उन्होंने कहा कि वह राजनीति में अपनी भूमिका को खेलों और युवाओं से जुड़े मुद्दों तक सीमित रखना चाहते थे। लेकिन जब उन्हें लगा कि उनकी बात नहीं सुनी जा रही है, तो उन्होंने अलग रास्ता चुनने का फैसला किया।
BJP में शामिल होने के बाद क्या है लक्ष्य?
BJP में शामिल होने के बाद हरभजन सिंह के सामने पंजाब में अपनी राजनीतिक भूमिका को नए सिरे से स्थापित करने की चुनौती है। क्रिकेट के मैदान पर लंबा अनुभव रखने वाले हरभजन पहले भी युवाओं और खेलों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं।उनके ताजा बयान से साफ है कि पंजाब में खेलों को बढ़ावा देना और नशे की समस्या जैसे मुद्दे उनकी राजनीतिक प्राथमिकताओं में बने हुए हैं। अब देखना होगा कि BJP के साथ रहते हुए वह इन मुद्दों को किस तरह उठाते हैं और पंजाब की राजनीति में उनकी नई भूमिका क्या रहती है।
टिप्पणी लिखें
बातचीत में शामिल होने के लिए कृपया साइन इन करें।
टिप्पणी करने के लिए साइन इन करेंखाता नहीं है? साइन अप करें