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Flight Attendants Cancer Risk: एयरक्रू में बढ़ा कैंसर का खतरा

Vinay kumar mishra
फ्लाइट अटेंडेंट और पायलटों में कॉस्मिक रेडिएशन के लंबे समय तक संपर्क से जुड़े कैंसर जोखिम पर नई रिसर्च ने चिंता बढ़ाई। • Source: News18
Source : News18

मुख्य बिंदु

  • Flight Attendants Cancer Risk: एयरक्रू में बढ़ा कैंसर का खतरा पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
  • सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
  • ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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नई रिसर्च में फ्लाइट अटेंडेंट और पायलटों में रेडिएशन से जुड़े कैंसर से मौत का जोखिम आम नौकरीपेशा लोगों से ज्यादा पाया गया

हवाई जहाज में सफर करने वालों के लिए उड़ान कुछ घंटों का अनुभव हो सकती है, लेकिन पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट के लिए आसमान ही उनका कार्यस्थल है। लगातार ऊंचाई पर उड़ान भरने और लंबे समय तक विमान में रहने के कारण एयरक्रू को कॉस्मिक रेडिएशन के संपर्क में रहना पड़ सकता है। अब एक नई रिसर्च ने पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट की सेहत को लेकर चिंता बढ़ाई है।शोधकर्ताओं के अनुसार, फ्लाइट अटेंडेंट और पायलटों में रेडिएशन से जुड़े कैंसर से मौत का जोखिम आम नौकरीपेशा लोगों की तुलना में अधिक पाया गया। हालांकि, रिसर्च यह साबित नहीं करती कि इन कैंसर मौतों का सीधा कारण केवल कॉस्मिक रेडिएशन ही है।

12 करोड़ से ज्यादा डेथ रिकॉर्ड का विश्लेषण

JAMA Internal Medicine में प्रकाशित इस रिसर्च में 12 करोड़ से अधिक डेथ सर्टिफिकेट के राष्ट्रीय आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें मृत लोगों के पेशे से संबंधित जानकारी भी शामिल थी।शोधकर्ताओं ने खास तौर पर उन कैंसर से होने वाली मौतों पर ध्यान दिया, जिनका संबंध रेडिएशन एक्सपोजर से माना जाता है। इनमें ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा और त्वचा, स्तन, थायरॉयड, प्रोस्टेट तथा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े कैंसर शामिल थे।500 से अधिक अलग-अलग पेशों की तुलना में फ्लाइट अटेंडेंट सबसे ऊपर रहे, जबकि पायलट दूसरे स्थान पर थे।

फ्लाइट अटेंडेंट में करीब 50% ज्यादा जोखिम

रिसर्च के अनुसार, फ्लाइट अटेंडेंट में आम नौकरीपेशा लोगों की तुलना में रेडिएशन से जुड़े कैंसर से मौत का जोखिम करीब 50 प्रतिशत अधिक पाया गया। वहीं पायलटों में यह जोखिम लगभग 36 प्रतिशत ज्यादा था।आंकड़ों के मुताबिक, फ्लाइट अटेंडेंट की कुल मौतों में करीब 6.9 प्रतिशत मौतें रेडिएशन से जुड़े कैंसर की श्रेणी में थीं। पायलटों के मामले में यह आंकड़ा लगभग 6.7 प्रतिशत रहा, जबकि आम नौकरीपेशा लोगों में यह करीब 5 प्रतिशत था।हालांकि, इन आंकड़ों को व्यक्तिगत स्तर पर कैंसर का खतरा तय करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

विमान में कहां से आता है रेडिएशन?

विमान में एयरक्रू के रेडिएशन एक्सपोजर का प्रमुख संभावित स्रोत कॉस्मिक रेडिएशन है। यह अंतरिक्ष से आने वाला आयोनाइजिंग रेडिएशन होता है।

धरती की सतह पर वायुमंडल इसका बड़ा हिस्सा रोक लेता है। लेकिन जैसे-जैसे विमान अधिक ऊंचाई पर जाता है, वायुमंडलीय सुरक्षा कम होती जाती है और कॉस्मिक रेडिएशन का एक्सपोजर बढ़ सकता है।जो लोग साल में कुछ ही बार विमान से यात्रा करते हैं, उनकी तुलना में पायलट और केबिन क्रू लगातार उड़ानों में रहते हैं। इसलिए लंबे समय तक और बार-बार उड़ान भरने वाले एयरक्रू का कुल एक्सपोजर अधिक हो सकता है।

सिर्फ रेडिएशन को कारण मानना सही नहीं

शोधकर्ताओं ने रिसर्च की कई सीमाओं को भी स्वीकार किया है। अध्ययन में यह जानकारी उपलब्ध नहीं थी कि किसी विशेष पायलट या फ्लाइट अटेंडेंट को अपने पूरे करियर के दौरान वास्तव में कितनी मात्रा में रेडिएशन मिला।इसके अलावा, डेथ सर्टिफिकेट में पेशे से जुड़ी जानकारी में गलती की संभावना भी हो सकती है। लगातार जेट लैग, अलग-अलग टाइम जोन में काम करना और अनियमित शिफ्ट भी शरीर की सर्केडियन रिदम को प्रभावित कर सकते हैं और स्वास्थ्य पर असर डाल सकते हैं।इसलिए विशेषज्ञों के मुताबिक केवल कॉस्मिक रेडिएशन को इन कैंसर मौतों का एकमात्र कारण मानना जल्दबाजी होगी।

एयरक्रू के लिए हेल्थ मॉनिटरिंग की सलाह

रिसर्च के साथ प्रकाशित विशेषज्ञ टिप्पणी में ऊंचाई पर लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी पर जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों ने एयरक्रू के लिए नियमित त्वचा जांच पर विचार करने की सलाह दी है। महिला एयरक्रू के लिए मैमोग्राफी की शुरुआत और उसकी आवृत्ति को लेकर व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर डॉक्टर से चर्चा करने की बात भी कही गई है।अमेरिकी विमानन प्रशासन पहले ही यह स्वीकार कर चुका है कि एयरक्रू आयोनाइजिंग रेडिएशन के संपर्क में आते हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं के अनुसार अमेरिका में एयरक्रू के लिए इस एक्सपोजर की अनिवार्य निगरानी या संघीय डोज लिमिट लागू नहीं है।

एयरक्रू की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

रिसर्च के लेखक डॉ. विशाल पटेल के अनुसार, किसी एक्सपोजर को मापे बिना उसे प्रभावी तरीके से मैनेज करना मुश्किल है। एयरक्रू का प्रतिनिधित्व करने वाली यूनियन की अध्यक्ष सारा नेल्सन ने भी रेडिएशन से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर कर्मचारियों के बीच बेहतर जानकारी और जागरूकता की जरूरत बताई है।नई रिसर्च ने एयरक्रू के स्वास्थ्य और काम के दौरान होने वाले रेडिएशन एक्सपोजर की निगरानी को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस शुरू कर दी है। हालांकि, इसके निष्कर्षों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य जोखिम की निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

TAGS: FlightAttendants CancerRisk RadiationExposure AircrewHealth HealthNews
Vinay kumar mishra

Vinay kumar mishra

टीमाइन्स न्यूज़ डेस्क आपके लिए भारत और दुनिया भर से 24/7 सटीक, निष्पक्ष और ब्रेकिंग न्यूज़ लाता है।

प्रकाशित तिथि: 19 Aug 2026
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