मुख्य बिंदु
- Barapullah Phase: 20 साल बाद खुला कॉरिडोर, पहले दिन जाम पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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Barapullah Phase: दो दशक बाद खुला कॉरिडोर, पहले दिन 15 मिनट का सफर बना लंबा जाम
Barapullah Phase: दिल्ली में लंबे इंतजार के बाद Barapullah Phase III कॉरिडोर आखिरकार बुधवार को शुरू हो गया। करीब दो दशक पहले जिस प्रोजेक्ट की कल्पना दिल्ली के ट्रैफिक को आसान बनाने और East Delhi को South Delhi से जोड़ने के लिए की गई थी, वह ऐसे समय में खुला है जब शहर की यातायात व्यवस्था और ट्रैफिक पैटर्न काफी बदल चुके हैं।इस कॉरिडोर से लोगों को उम्मीद थी कि Mayur Vihar से AIIMS तक का सफर करीब 15 मिनट में पूरा हो सकेगा। हालांकि, उद्घाटन के पहले ही दिन यात्रियों को लंबे ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा और 15 मिनट का वादा किया गया सफर काफी लंबा हो गया।
Commonwealth Games के समय बनी थी योजना
Barapullah Elevated Road की योजना 2000 के दशक के मध्य में बनाई गई थी। उस समय दिल्ली 2010 Commonwealth Games की तैयारी कर रही थी। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा signal-free corridor तैयार करना था, जो East और South Delhi के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करे और मौजूदा सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम करे।Barapullah Corridor को कुल चार phases में विकसित करने की योजना बनाई गई थी। Phase I Sarai Kale Khan से Jawaharlal Nehru Stadium के बीच बनाया गया और 2010 में Commonwealth Games से पहले पूरा हुआ। इसके बाद Phase II को INA की ओर बढ़ाया गया।Phase III को Sarai Kale Khan से Mayur Vihar तक Yamuna के पार जोड़ने के लिए तैयार किया गया। पूरी योजना को शुरुआती तौर पर 2017 तक operational करने का लक्ष्य रखा गया था।
10 किलोमीटर के कॉरिडोर में क्यों हुई देरी?
Phase III का निर्माण अप्रैल 2015 में शुरू हुआ था और इसे अक्टूबर 2017 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, प्रोजेक्ट के अंतिम हिस्से में जमीन से जुड़ी समस्या सामने आने के बाद काम अटक गया।Mayur Vihar से AIIMS तक करीब 10 किलोमीटर लंबे flyover के आखिरी 900 मीटर का काम 2.5 एकड़ निजी कृषि भूमि के अधिग्रहण में देरी के कारण प्रभावित हुआ। अधिकारियों के अनुसार, जिस जमीन को निर्माण के लिए उपलब्ध माना गया था, वह 1995 में de-notify होकर मूल मालिकों को वापस की जा चुकी थी।2015 में DDA, PWD और राजस्व अधिकारियों के संयुक्त निरीक्षण में इस स्थिति का पता चला। इसके बाद जमीन मालिकों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद औपचारिक अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की गई।अब Phase III के खुलने के बाद उम्मीद है कि East Delhi और South Delhi के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। हालांकि, पहले दिन सामने आया ट्रैफिक दबाव यह सवाल भी खड़ा करता है कि करीब दो दशक पहले तैयार की गई योजना आज की दिल्ली की बदल चुकी यातायात जरूरतों को कितना पूरा कर पाएगी।
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