Muzaffarpur Land Scam: बिहार के मुजफ्फरपुर में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ा एक बड़ा कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। आरोप है कि 34 कट्ठा जमीन के सौदे के नाम पर एक कारोबारी से ₹12.45 करोड़ से अधिक की राशि ली गई, लेकिन बदले में केवल 9 कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।पुलिस के अनुसार, कच्ची-पक्की ओपी क्षेत्र के रतवारा निवासी राकेश कुमार ने काजी मोहम्मदपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि विजय कुमार सिंह, उनकी पत्नी अर्चना सिंह, घनश्याम पटेल और उनकी पत्नी बेबी पटेल ने 34 कट्ठा जमीन बेचने का समझौता किया था। यह जमीन मझौली धर्मदास थाना क्षेत्र में स्थित बताई गई है।
₹12.45 करोड़ का भुगतान, लेकिन अधूरी रजिस्ट्री
शिकायतकर्ता के अनुसार, 21 जनवरी 2022 से 10 अप्रैल 2026 के बीच उन्होंने नकद और बैंकिंग माध्यमों से कुल ₹12 करोड़ 45 लाख का भुगतान किया। इसके बावजूद अब तक केवल 9 कट्ठा जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब ₹5.40 करोड़ बताई जा रही है।राकेश कुमार का आरोप है कि बाकी जमीन की रजिस्ट्री नहीं की गई और न ही शेष राशि लौटाई गई। उनके अनुसार, करीब ₹7.05 करोड़ की रकम अब भी बकाया है।
आगे बेचने के लिए खरीदी थी जमीन
पीड़ित कारोबारी का कहना है कि उन्होंने यह जमीन आगे निवेश और बिक्री के उद्देश्य से खरीदी थी। लेकिन पूरी जमीन की रजिस्ट्री नहीं होने के कारण अब उनके खरीदार भी भुगतान वापस मांग रहे हैं। इससे उन्हें आर्थिक और कानूनी दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस कार्रवाई जारी
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घनश्याम पटेल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, घनश्याम पटेल मुख्य आरोपी विजय कुमार सिंह का साला है। वहीं, प्राथमिकी में नामजद अन्य तीन आरोपी फिलहाल फरार हैं।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही पूरे जमीन सौदे और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।
बढ़ सकती हैं कानूनी मुश्किलें
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आर्थिक अपराध की गंभीर धाराओं के तहत आगे बढ़ सकता है। फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान और दस्तावेजों की जांच कर रही है।यह मामला एक बार फिर बड़े भूमि सौदों में पारदर्शिता और कानूनी सत्यापन की आवश्यकता को उजागर करता है।
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