मुख्य बिंदु
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Ravi Kishan Karwa Chauth 2026: पत्नी प्रीति शुक्ला के साथ लखनऊ में मनाया त्योहार, तस्वीरें वायरल
सांसद और अभिनेता रवि किशन ने पत्नी प्रीति शुक्ला के साथ लखनऊ में करवा चौथ मनाया। इस खास मौके पर उन्होंने व्रत रखने वाली महिलाओं को शुभकामनाएं दीं और भारतीय परंपराओं के महत्व को साझा किया। गोरखपुर: Ravi Kishan Karwa Chauth 2026 का जश्न इस बार खास अंदाज में देखने को मिला। गोरखपुर से सांसद और फिल्म अभिनेता रवि किशन ने 29 अक्टूबर को अपनी पत्नी प्रीति शुक्ला और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ करवा चौथ का त्योहार मनाया। इस अवसर पर वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मौजूद थे, जहां उन्होंने राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर पत्नी के साथ इस पारंपरिक पर्व को मनाया। रवि किशन ने इस खास मौके की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। तस्वीरों में वह अपनी पत्नी प्रीति शुक्ला और परिवार के सदस्यों के साथ नजर आए। इस दौरान उन्होंने करवा चौथ का व्रत रखने वाली सभी महिलाओं को पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।
पत्नी प्रीति शुक्ला के साथ मनाया करवा चौथ
करवा चौथ के अवसर पर रवि किशन अपनी पत्नी प्रीति शुक्ला के साथ पारंपरिक उत्सव का हिस्सा बने। लखनऊ में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के आवास पर आयोजित इस पारिवारिक समारोह में परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे। रवि किशन ने इस मौके को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा खास अवसर बताया। सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों के जरिए उन्होंने अपने प्रशंसकों को भी इस उत्सव की झलक दिखाई। उनकी पोस्ट के बाद करवा चौथ के मौके पर उनकी पारिवारिक तस्वीरें चर्चा में आ गईं।
रवि किशन ने बताया करवा चौथ का महत्व
रवि किशन ने करवा चौथ की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह भारतीय परंपरा का ऐसा पर्व है, जिसमें प्रेम, विश्वास, समर्पण और दांपत्य जीवन की खुशहाली की भावना जुड़ी होती है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। उन्होंने इस पर्व की भावनात्मक अहमियत पर भी जोर दिया। करवा चौथ केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते में आपसी विश्वास, सम्मान और समर्पण को भी दर्शाता है। इस दिन महिलाएं पूरे उत्साह के साथ व्रत रखती हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए पूजा-अर्चना करती हैं।
चांद के दर्शन के बाद पूरा होता है व्रत
करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर पूजा-पाठ और धार्मिक तैयारियों के बाद शाम को करवा माता, भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। रात में चंद्रमा निकलने का इंतजार किया जाता है। चंद्र दर्शन के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और पारंपरिक विधि-विधान से पूजा पूरी करती हैं। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इस पर्व को मनाने की परंपराओं में कुछ अंतर भी देखने को मिलता है।
परंपरा और पारिवारिक रिश्तों का प्रतीक है यह त्योहार
करवा चौथ की खासियत केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है। यह त्योहार परिवारों को एक साथ आने और रिश्तों में आत्मीयता बढ़ाने का अवसर भी देता है। इस दिन महिलाएं पारंपरिक कपड़े पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और सोलह शृंगार करके पूजा की तैयारी करती हैं। शाम को महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देती हैं। पूजा की थाली, सजावट, पारंपरिक गीत और चंद्र दर्शन इस त्योहार के उत्साह को और बढ़ा देते हैं। समय के साथ करवा चौथ मनाने के तरीकों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन इस पर्व से जुड़ी भावनाएं आज भी कायम हैं। रवि किशन ने भी इस अवसर पर व्रती महिलाओं के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया।
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