मुख्य बिंदु
- Radha Ashtami 2026: प्रेमानंद जी महाराज ने बताए व्रत के नियम पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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Radha Ashtami 2026: प्रेमानंद जी महाराज ने बताया व्रत का सही नियम, ऐसे पाएं श्रीजी की कृपा
Radha Ashtami 2026: राधा रानी के भक्तों के लिए राधा अष्टमी का पर्व बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री राधा रानी का प्राकट्य हुआ था। इस दिन भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ राधा रानी की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। माना जाता है कि विधि-विधान से राधा अष्टमी का व्रत करने से श्रीजी की कृपा प्राप्त होती है।वहीं वृंदावन के संत प्रेमानंद जी महाराज ने राधा अष्टमी व्रत को लेकर महत्वपूर्ण नियम बताए हैं। उनके अनुसार यह व्रत केवल भोजन छोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रीजी के प्रति प्रेम, ध्यान और भक्ति से जुड़ा हुआ है।
राधा अष्टमी पर क्या करना चाहिए?
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, राधा अष्टमी के दिन प्रातःकालीन बेला में भोजन नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि इस समय श्री राधा रानी के प्राकट्य का स्मरण और ध्यान करना चाहिए। इसके बाद विधिपूर्वक राधा रानी का अभिषेक और श्रृंगार करके पूजा-अर्चना की जा सकती है।पूजा के बाद चरणामृत ग्रहण करने की परंपरा भी बताई गई है। महाराज के अनुसार, इसके बाद किसी तरह के विशेष नियम का दिखावा करने के बजाय भक्त को अपना ध्यान श्रीजी की भक्ति में लगाना चाहिए।
सिर्फ पकवान खाना व्रत नहीं
प्रेमानंद जी महाराज ने राधा अष्टमी व्रत को लेकर यह भी समझाया कि इस दिन तरह-तरह के पकवान बनाकर उनका सेवन करना व्रत का उद्देश्य नहीं है। भक्त को इस दिन अधिक से अधिक श्रीजी का ध्यान और कीर्तन करना चाहिए।उनके अनुसार, राधा अष्टमी का व्रत प्रेम और भक्ति से जुड़ा है। इसलिए बाहरी दिखावे की जगह मन को राधा रानी के चरणों में लगाना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।
2026 में कब है राधा अष्टमी?
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी तिथि 18 सितंबर 2026 को दोपहर 1 बजे शुरू होगी और 19 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 19 सितंबर 2026 को राधा अष्टमी का व्रत किया जाएगा।इस दिन भक्त राधा रानी का पूजन, अभिषेक, श्रृंगार और आरती कर सकते हैं। अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा की विधि अपनाई जा सकती है।
राधा अष्टमी पर दान का महत्व
राधा अष्टमी के दिन दान-पुण्य को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।भक्त सुबह स्नान करके राधा रानी की पूजा करें, उनका स्मरण करें और इसके बाद जरूरतमंदों की सहायता कर सकते हैं। इस तरह राधा अष्टमी का पर्व पूजा के साथ-साथ सेवा और भक्ति का अवसर भी बन जाता है।नोट: व्रत की तिथि और पूजा संबंधी नियमों में क्षेत्र तथा परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।
Kumkum
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