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Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूरी कहानी, जानें कंस से लेकर गोकुल पहुंचने तक की कथा

Kirti Sharma
जन्माष्टमी पर जानें भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और कंस वध की पूरी कथा।
Source : tmins.in

मुख्य बिंदु

  • Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूरी कहानी, जानें कंस से लेकर गोकुल पहुंचने तक की कथा पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
  • सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
  • ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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Janmashtami 2026: जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व भगवान विष्णु के आठवें अवतार माने जाने वाले श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ गया था, तब भगवान कृष्ण ने मथुरा में जन्म लेकर कंस के अत्याचार का अंत किया और धर्म की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। कृष्ण जन्म की यह कथा न केवल रोमांचक है, बल्कि इसमें धर्म, सत्य और ईश्वर की शक्ति का संदेश भी छिपा है।

कंस को क्यों मिला था अपनी मृत्यु का डर?

द्वापर युग में मथुरा पर राजा कंस का शासन था। कंस अत्यंत शक्तिशाली और क्रूर शासक था। उसकी बहन देवकी का विवाह यदुवंशी राजकुमार वसुदेव से हुआ था। विवाह के बाद जब कंस स्वयं देवकी को विदा करने जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस के वध का कारण बनेगी।

यह सुनकर कंस भयभीत हो गया और उसने देवकी तथा वसुदेव को कारागार में डाल दिया। कंस ने देवकी की संतानों को जन्म लेते ही मारने का निर्णय कर लिया।

देवकी की छह संतानों की हत्या

धार्मिक कथा के अनुसार, देवकी की पहली छह संतानों को कंस ने एक-एक करके मार डाला। सातवीं संतान के रूप में शेषनाग के अवतार माने जाने वाले बलराम का जन्म होने वाला था। मान्यता है कि भगवान की योगमाया से बलराम का गर्भ देवकी से रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया। इस कारण लोगों को लगा कि देवकी का सातवां गर्भ नष्ट हो गया।

इसके बाद देवकी की आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय आया।

आधी रात को हुआ श्रीकृष्ण का जन्म

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा की जेल में जन्म लिया। मान्यता है कि उनके जन्म के समय कारागार दिव्य प्रकाश से भर गया।

भगवान कृष्ण ने अपने दिव्य स्वरूप में देवकी और वसुदेव को दर्शन दिए और उन्हें बताया कि वे स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं। उन्होंने वसुदेव को आदेश दिया कि वे उन्हें तत्काल गोकुल ले जाएं, जहां नंद बाबा और यशोदा के घर एक कन्या का जन्म हुआ था।

वसुदेव कृष्ण को लेकर निकले

भगवान की आज्ञा मिलते ही वसुदेव कृष्ण को टोकरी में रखकर कारागार से बाहर निकल पड़े। कथा के अनुसार, उस समय कारागार के सभी द्वार अपने आप खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए।

वसुदेव कृष्ण को लेकर यमुना नदी के किनारे पहुंचे। उस समय यमुना उफान पर थी। वसुदेव नदी में उतर गए और भगवान कृष्ण को सिर के ऊपर उठाकर आगे बढ़ने लगे। मान्यता है कि भगवान शेषनाग ने अपने फन फैलाकर बाल कृष्ण और वसुदेव को बारिश से बचाया।

भगवान की कृपा से वसुदेव यमुना पार करके गोकुल पहुंच गए।

कृष्ण पहुंचे नंद-यशोदा के घर

गोकुल में उसी रात यशोदा ने एक कन्या को जन्म दिया था। वसुदेव ने बाल कृष्ण को यशोदा के पास सुला दिया और वहां जन्मी कन्या को लेकर मथुरा की जेल में लौट आए।

जैसे ही कंस को देवकी की आठवीं संतान के जन्म की खबर मिली, वह कारागार पहुंच गया। उसने कन्या को भी मारने की कोशिश की, लेकिन वह उसके हाथ से निकलकर आकाश में प्रकट हो गई।

उस दिव्य कन्या ने कंस को चेतावनी दी कि जिससे उसे भय है, वह जन्म ले चुका है और कहीं सुरक्षित स्थान पर है।

कृष्ण ने किया कंस का अंत

गोकुल और वृंदावन में श्रीकृष्ण का बचपन बीता। उन्होंने अनेक बाल लीलाएं कीं। उनकी माखन चोरी, गोपियों के साथ रास और ग्वाल-बालों के साथ की गई लीलाएं आज भी कृष्ण भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

बड़े होने पर श्रीकृष्ण मथुरा पहुंचे और कंस को युद्ध में पराजित कर उसका वध किया। इस प्रकार मथुरा की प्रजा को कंस के अत्याचार से मुक्ति मिली।

जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?

श्रीकृष्ण के जन्म की यही कथा जन्माष्टमी के पर्व का आधार है। भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान कृष्ण की बाल स्वरूप में पूजा करते हैं। मंदिरों और घरों में झांकियां सजाई जाती हैं तथा रात 12 बजे कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जाता है।

जन्माष्टमी की कथा का सबसे बड़ा संदेश यही है कि जब अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर का अवतार होता है। भगवान कृष्ण का जीवन सत्य, प्रेम, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

जन्माष्टमी का संदेश

श्रीकृष्ण की जन्म कथा केवल एक धार्मिक कहानी नहीं है। यह विश्वास, धैर्य और अच्छाई की जीत का संदेश देती है। कंस के अत्याचार के सामने वसुदेव और देवकी ने धैर्य नहीं खोया और अंततः अधर्म का अंत हुआ। इसलिए जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने के साथ-साथ उनके बताए धर्म, कर्म और सत्य के मार्ग को अपनाने का संकल्प भी लिया जाता है।

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Kirti Sharma

Kirti Sharma

कीर्ति शर्मा पिछले 2 वर्षों से डिजिटल पत्रकारिता से जुड़ी हुई हैं। TMINS में वह Sub Editor के रूप में कार्यरत हैं। उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में प्रकाशित होने वाले कंटेंट की संपादकीय समीक्षा (Editorial Review), क्वालिटी चेक, स्पॉन्सर्ड आर्टिकल्स की जांच एवं अनुमोदन शामिल है। इसके अलावा, वह Breaking News और Local News की नियमित कवरेज करती हैं तथा महत्वपूर्ण घटनाओं पर लगातार नज़र रखते हुए समय-समय पर समाचारों को अपडेट करती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तेज़, सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना है।

प्रकाशित तिथि: 29 Aug 2026
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