केंद्रीय मंत्री JP Nadda AIIMS दिल्ली में भर्ती, एंजियोग्राफी हुई
JP Nadda Health: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को असहज महसूस होने के बाद दिल्ली के AIIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती होने के बाद गुरुवार शाम उनकी कोरोनरी एंजियोग्राफी की गई।AIIMS की ओर से जारी बयान के अनुसार, जेपी नड्डा की हालत फिलहाल स्थिर है और उन्हें कार्डियोलॉजी विभाग में निगरानी के लिए भर्ती रखा गया है।
असहज महसूस होने के बाद AIIMS पहुंचे JP Nadda
65 वर्षीय जेपी नड्डा को तबीयत में असहजता महसूस होने के बाद AIIMS दिल्ली लाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जांच की और इसके बाद उनकी कोरोनरी एंजियोग्राफी की गई।AIIMS ने अपने बयान में बताया कि जेपी नड्डा की हालत स्थिर है और उन्हें कार्डियोलॉजी विभाग में ऑब्जर्वेशन के लिए रखा गया है। डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
JP Nadda का राजनीतिक सफर
जेपी नड्डा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर भी रह चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्हें केंद्र सरकार में मंत्री बनाया गया।नड्डा ने पार्टी संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं और लंबे समय तक BJP की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई है।
क्या होती है कोरोनरी एंजियोग्राफी?
कोरोनरी एंजियोग्राफी एक मेडिकल जांच है, जिसका इस्तेमाल हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिकाओं की स्थिति देखने के लिए किया जाता है। इस जांच से डॉक्टर यह पता लगा सकते हैं कि कोरोनरी धमनियों में किसी तरह का संकुचन या ब्लॉकेज तो नहीं है।यह जांच हृदय की रक्त वाहिकाओं में रक्त प्रवाह और संभावित रुकावटों का पता लगाने में डॉक्टरों की मदद करती है।
कैसे की जाती है कोरोनरी एंजियोग्राफी?
कोरोनरी एंजियोग्राफी के दौरान डॉक्टर आमतौर पर एक पतली ट्यूब यानी कैथेटर को कलाई या जांघ के पास मौजूद धमनी के जरिए रक्त वाहिका में डालते हैं।
इसके बाद कैथेटर के माध्यम से एक विशेष कॉन्ट्रास्ट डाई दी जाती है। एक्स-रे इमेजिंग की मदद से इस डाई के रक्त वाहिकाओं में प्रवाह को देखा जाता है। इससे डॉक्टर कोरोनरी धमनियों को स्पष्ट रूप से देखकर किसी संभावित संकुचन या ब्लॉकेज की पहचान कर सकते हैं।
फिलहाल स्थिर है JP Nadda की हालत
AIIMS के मुताबिक, जेपी नड्डा की स्थिति फिलहाल स्थिर है। उन्हें कार्डियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर आगे की जानकारी अस्पताल या उनके कार्यालय की ओर से सामने आने की उम्मीद है।
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