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International Youth Day: 20 की उम्र में डायबिटीज, BP और फैटी लिवर का खतरा

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युवाओं में खराब लाइफस्टाइल के कारण डायबिटीज, हाई BP और फैटी लिवर का खतरा बढ़ रहा है। • Source: First post
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मुख्य बिंदु

  • International Youth Day: 20 की उम्र में डायबिटीज, BP और फैटी लिवर का खतरा पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
  • सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
  • ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
  • नीचे पूरा विस्तृत विवरण पढ़ें।

खराब खान-पान, कम एक्सरसाइज, तनाव और नींद की कमी से युवाओं में मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है

International Youth Day युवाओं की ऊर्जा, महत्वाकांक्षा और क्षमता को सेलिब्रेट करने का अवसर है। लेकिन यह दिन युवा पीढ़ी की सेहत पर ध्यान देने का भी मौका देता है। आज डॉक्टरों के सामने एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है। 20 और 30 की उम्र के युवाओं में प्रीडायबिटीज, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर जैसी मेटाबॉलिक बीमारियां तेजी से सामने आ रही हैं।डॉ. वी. सोमा श्रीनिवास, कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल, फोर्टिस नेटवर्क, लाकड़ीकापूल, हैदराबाद के अनुसार, पिछले एक दशक में मरीजों के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उनके मुताबिक, जो बीमारियां पहले 40 और 50 की उम्र के लोगों में अधिक आम थीं, वे अब 20 की उम्र के युवाओं में भी देखी जा रही हैं।

युवाओं में इतनी कम उम्र में क्यों बढ़ रहा मेटाबॉलिक बीमारी का खतरा?

इस बदलाव के पीछे कोई एक कारण नहीं है। बदलती जीवनशैली, खान-पान, तनाव और नींद से जुड़े कई कारक मिलकर युवाओं के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।

1. Sedentary Lifestyle यानी शारीरिक गतिविधि की कमी

आज युवा लंबे समय तक ऑफिस, कॉलेज या घर पर बैठकर काम करते हैं। एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधि की कमी शरीर की ग्लूकोज इस्तेमाल करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, जब मांसपेशियां पर्याप्त सक्रिय नहीं रहतीं तो समय के साथ इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो सकता है। इससे ब्लड शुगर बढ़ने और डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।

2. Ultra-Processed Food का बढ़ता सेवन

युवाओं के खान-पान में भी बड़ा बदलाव आया है। फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन वजन बढ़ने, कोलेस्ट्रॉल बिगड़ने और फैटी लिवर जैसी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।खास बात यह है कि मेटाबॉलिक समस्या केवल अधिक वजन वाले लोगों में ही नहीं होती। बाहर से फिट दिखने वाला व्यक्ति भी अंदर से मेटाबॉलिक जोखिम का सामना कर सकता है।

3. Chronic Stress यानी लगातार तनाव

पढ़ाई, नौकरी, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के कारण युवाओं में तनाव बढ़ रहा है।लगातार तनाव से शरीर में कोर्टिसोल जैसे हार्मोन का स्तर प्रभावित हो सकता है। इसका असर ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और शरीर में फैट जमा होने के तरीके पर पड़ सकता है।

4. Poor Sleep यानी नींद की कमी

नींद की कमी को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। नियमित रूप से पर्याप्त नींद न लेने से भूख और ग्लूकोज नियंत्रण से जुड़े हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं।डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, लगातार छह से सात घंटे से कम नींद लेना लंबे समय में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे मेटाबॉलिक जोखिमों को बढ़ा सकता है।

बाहर से फिट दिखना पूरी सेहत की गारंटी नहीं

युवाओं में एक बड़ी समस्या यह है कि वे अक्सर अपनी सेहत का अंदाजा केवल शरीर के आकार या वजन से लगाते हैं।डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, कोई व्यक्ति बाहर से फिट दिखाई दे सकता है, लेकिन उसके ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल या ब्लड प्रेशर जैसे पैरामीटर सामान्य न हों। इसलिए केवल BMI या बाहरी रूप देखकर मेटाबॉलिक हेल्थ का आकलन करना पर्याप्त नहीं है।

इन Warning Signs को न करें नजरअंदाज

मेटाबॉलिक बीमारियों के शुरुआती लक्षण कई बार बहुत सामान्य होते हैं। लगातार थकान, ज्यादा प्यास लगना और बार-बार पेशाब आना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं।इसके अलावा युवाओं को इन संकेतों पर भी ध्यान देना चाहिए:,बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ना,पेट के आसपास ज्यादा फैट जमा होना,परिवार में डायबिटीज, ,हाई BP या हृदय रोग का इतिहास,त्वचा पर ज्यादा स्किन टैग होना,गर्दन के आसपास त्वचा का काला पड़ना,अगर इनमें से कई संकेत मौजूद हैं तो डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना बेहतर है।

20 और 30 की उम्र में कौन-सी Health Checks जरूरी?

स्वस्थ महसूस करने वाले युवाओं में भी नियमित स्वास्थ्य जांच से मेटाबॉलिक जोखिमों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर युवाओं को नियमित बेसिक हेल्थ स्क्रीनिंग पर विचार करना चाहिए।

इन जांचों में शामिल हो सकते हैं:

  • Fasting Blood Sugar और HbA1c: प्रीडायबिटीज और डायबिटीज का पता लगाने के लिए
  • Lipid Profile: कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच के लिए
  • Blood Pressure: क्योंकि हाई BP कई बार बिना लक्षण के रहता है
  • BMI और Waist Circumference: खासकर पेट के आसपास मोटापे का आकलन करने के लिए
  • Liver Function Tests और जरूरत पड़ने पर Ultrasound: फैटी लिवर के जोखिम का आकलन करने के लिए

समय पर जांच कराने से किसी भी समस्या की पहचान शुरुआती चरण में हो सकती है।

Lifestyle Changes से सुधर सकती है सेहत

मेटाबॉलिक बीमारियों से बचाव के लिए हमेशा बहुत बड़े बदलाव करने की जरूरत नहीं होती। रोजमर्रा की जिंदगी में छोटे और लगातार किए जाने वाले बदलाव भी मददगार हो सकते हैं।डॉ. श्रीनिवास हर सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देते हैं। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना भी जरूरी है।खाने में घर का बना भोजन, पर्याप्त प्रोटीन और फाइबर शामिल करना चाहिए और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को कम करना चाहिए।इसके साथ रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद, नियमित स्लीप शेड्यूल और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश भी जरूरी है।धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन सीमित करना भी मेटाबॉलिक और लिवर हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण है।

20 की उम्र से ही शुरू करें Health की देखभाल

युवा होना अपने आप में मेटाबॉलिक रूप से स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है। डायबिटीज, हाई BP और फैटी लिवर जैसी समस्याएं धीरे-धीरे विकसित हो सकती हैं और कई बार लंबे समय तक इनके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।डॉ. श्रीनिवास के अनुसार, 20 और 30 की उम्र मेटाबॉलिक हेल्थ पर ध्यान देने के लिए सही समय है।अगर जोखिमों की पहचान समय रहते कर ली जाए और जीवनशैली में जरूरी बदलाव किए जाएं, तो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की संभावना को कम किया जा सकता है।इसलिए युवाओं को 40 की उम्र का इंतजार करने के बजाय आज से ही अपनी डाइट, एक्सरसाइज, नींद और मानसिक तनाव पर ध्यान देना चाहिए।

TAGS: InternationalYouthDay2026 YouthHealth Diabetes FattyLiver HighBP
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Suhani

सुहानी TMINS में Content Writer के रूप में कार्यरत हैं। उनकी विशेषज्ञता Technology और Trending Topics से जुड़े समाचार, फीचर लेख और विश्लेषण तैयार करने में है। वह नवीनतम टेक्नोलॉजी अपडेट्स, डिजिटल ट्रेंड्स और वायरल विषयों पर लगातार नज़र रखती हैं तथा शोध आधारित, तथ्यात्मक और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक समय पर विश्वसनीय, उपयोगी और सटीक जानकारी पहुँचाना है।

प्रकाशित तिथि: 12 Aug 2026
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