मुख्य बिंदु
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Rohtas: धान में अधिक उत्पादन के लिए संतुलित उर्वरक अपनाएं
Rohtas News: धान की फसल से बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बिक्रमगंज के मृदा वैज्ञानिक डॉ. रामाकांत सिंह ने किसानों को सलाह दी कि धान की किस्म और उसकी अवधि के अनुसार नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और जिंक का सही मात्रा में प्रयोग करने से उत्पादन बढ़ता है और मिट्टी की उर्वराशक्ति भी लंबे समय तक बनी रहती है।
उन्होंने यह जानकारी खाद बिक्री के लिए लाइसेंस प्राप्त करने के इच्छुक आवेदकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से उर्वरकों का उपयोग करने से लागत कम होती है और फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है।
धान की अवधि के अनुसार उर्वरक की मात्रा
डॉ. रामाकांत सिंह ने बताया कि 135 दिन से अधिक अवधि वाली धान की किस्मों के लिए प्रति हेक्टेयर 120 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश और 6 किलोग्राम जिंक की आवश्यकता होती है।
130 दिन अवधि वाली किस्मों के लिए 110 किलोग्राम नाइट्रोजन, 55 किलोग्राम फॉस्फोरस, 35 किलोग्राम पोटाश तथा 5 किलोग्राम जिंक की अनुशंसा की गई है। वहीं, 120 दिन तक की कम अवधि वाली किस्मों में 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 50 किलोग्राम फॉस्फोरस, 35 किलोग्राम पोटाश और 5 किलोग्राम जिंक का प्रयोग पर्याप्त माना गया है।
चरणबद्ध तरीके से करें खाद का प्रयोग
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि उर्वरकों का उपयोग एक साथ करने के बजाय अलग-अलग चरणों में करना अधिक लाभदायक होता है।
रोपाई के समय डीएपी की पूरी मात्रा, पोटाश की दो-तिहाई मात्रा और यूरिया की एक-तिहाई मात्रा बेसल डोज के रूप में डालनी चाहिए।
रोपाई के 25 से 40 दिन बाद यूरिया की एक-तिहाई मात्रा और जिंक सल्फेट की आधी मात्रा का प्रयोग करना चाहिए।
इसके बाद बालियां निकलने या फूल आने से पहले बची हुई यूरिया, पोटाश और जिंक का उपयोग करने से फसल का बेहतर विकास होता है और पैदावार बढ़ती है।
मिट्टी जांच के आधार पर करें उर्वरक प्रबंधन
डॉ. रामाकांत सिंह ने किसानों से अपील की कि वे मिट्टी की जांच कराकर ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि आवश्यकता से अधिक यूरिया का उपयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और उत्पादन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से न केवल धान की उपज बढ़ती है, बल्कि मिट्टी की उर्वराशक्ति भी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। आधुनिक खेती में वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुख्य बातें
• धान की अवधि के अनुसार उर्वरकों की मात्रा तय करें।
• नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और जिंक का संतुलित प्रयोग करें।
• खाद का उपयोग तीन चरणों में करने से उत्पादन बेहतर होता है।
• मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक प्रबंधन अपनाएं।
• अधिक यूरिया के प्रयोग से बचें, इससे मिट्टी की उर्वराशक्ति सुरक्षित रहती है।
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