मुख्य बिंदु
- Bhopal में मूंग खरीद को लेकर किसानों का बड़ा आंदोलन पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
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Bhopal में मूंग खरीद को लेकर किसानों का बड़ा आंदोलन
Bhopal: मध्य प्रदेश में मूंग की फसल की 100 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। हजारों किसान अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना बनाने के बर्तन और करीब एक सप्ताह का राशन लेकर भोपाल के बाहरी इलाके में पहुंच गए हैं। किसानों ने सावरकर सेतु के पास डेरा डाल दिया है और सरकार से अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
किसानों का यह प्रदर्शन संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले किया जा रहा है, जिसमें 19 किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी के कई प्रवेश मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया है और कई जगह बैरिकेडिंग की गई है। वहीं, प्रभावित क्षेत्रों के कुछ स्कूलों में छुट्टी भी घोषित कर दी गई है।
सरकार ने केंद्र से मांगा हस्तक्षेप
किसानों के बढ़ते आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। राज्य के किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग खरीद का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया है।
पत्र के अनुसार, 14 मई से 3 जुलाई 2026 के बीच प्रदेश में लगभग 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्पादन हुआ, जबकि अब तक केवल 4.54 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि मौजूदा लक्ष्य के कारण बड़ी संख्या में किसान MSP का लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे।
100% MSP खरीद की मांग पर अड़े किसान
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार राज्य की पूरी मूंग फसल की MSP पर खरीद और खाद वितरण से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अरहर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत MSP पर खरीद की घोषणा की है, लेकिन मूंग की खरीद अब भी प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत सीमित मात्रा में की जाती है। इस योजना के तहत खरीद राज्य के अनुमानित उत्पादन के लगभग 25 प्रतिशत तक सीमित रहती है।
बाजार में MSP से कम दाम मिलने का आरोप
किसान संगठनों का कहना है कि खरीद सीमा के कारण बड़ी मात्रा में मूंग खुले बाजार में बेचनी पड़ती है, जहां किसानों को 2026-27 के लिए निर्धारित 8,768 रुपये प्रति क्विंटल MSP से काफी कम कीमत मिल रही है।
किसान नेता संतोष पटवारी ने कहा कि पिछले 20 दिनों से किसान लगातार अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, इसलिए मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला लिया गया है।
नर्मदापुरम से शुरू हुआ आंदोलन
यह आंदोलन नर्मदापुरम के सेठाणी घाट से शुरू हुआ, जहां बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए और भोपाल की ओर मार्च शुरू किया। शुरुआत में प्रशासन ने किसानों को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद वे धरने पर बैठ गए। बाद में बैरिकेड हटने के बाद किसान आगे बढ़े और ओबैदुल्लागंज तथा रायसेन होते हुए राजधानी के बाहरी क्षेत्रों तक पहुंच गए।
भोपाल की सीमा पर पुलिस ने टोल प्लाजा और मंडीदीप बॉर्डर सहित कई स्थानों पर फिर से बैरिकेड लगाए। प्रशासन ने किसान नेताओं से राजधानी में प्रवेश करने के बजाय ज्ञापन सौंपने की अपील की, लेकिन किसान अपने आंदोलन पर कायम हैं।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ रही नाराजगी
किसान संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन केवल मूंग खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती से जुड़ी कई पुरानी समस्याओं का परिणाम है। किसानों का आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में देरी, पंजीकरण संबंधी दिक्कतें, सीमित खरीद, खाद की कमी और बढ़ती खेती लागत के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है।
उनका कहना है कि अच्छी पैदावार के बावजूद उचित मूल्य नहीं मिलने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द समाधान निकालना चाहिए ताकि किसानों को MSP का पूरा लाभ मिल सके।
फिलहाल क्या स्थिति है?
फिलहाल हजारों किसान भोपाल के बाहरी इलाके में डेरा डाले हुए हैं और मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, राज्य सरकार ने केंद्र से अतिरिक्त खरीद की मंजूरी देने का अनुरोध किया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार किसानों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और आंदोलन का आगे क्या रुख रहता है।
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