मुख्य बिंदु
- Pitri Paksha 2026: गया से पहले यहां होता है पिंडदान पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
- सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
- ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
- नीचे पूरा विस्तृत विवरण पढ़ें।
Pitri Paksha 2026: मोक्ष का प्रथम द्वार! गया से पहले यहां किया जाता है पिंडदान, जानिए श्री राम ने क्यों किया था पहला तर्पण!
Pitri Paksha 2026: पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। बिहार का गया पितरों के पिंडदान के लिए प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गया पहुंचने से पहले भी एक विशेष स्थान पर तर्पण और पिंडदान किया जाता है। यह स्थान है पुनपुन नदी का घाट, जिसे पितृमोक्ष का पहला द्वार माना जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पुनपुन नदी में स्नान, तर्पण और प्रथम पिंडदान करने के बाद गया जाकर फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस स्थान का संबंध भगवान श्री राम और माता सीता से भी जोड़ा जाता है।
पितृपक्ष 2026 कब से शुरू होगा?
साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से होगी। नियमित पितृपक्ष 27 सितंबर को कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से शुरू माना जाएगा और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष में पूर्वजों के लिए श्रद्धा, तर्पण और पिंडदान करने से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि पितरों का आशीर्वाद परिवार में सुख, समृद्धि और उन्नति लेकर आता है।
पुनपुन नदी को क्यों कहा जाता है मोक्ष का प्रथम द्वार?
पटना जिले के पास स्थित पुनपुन नदी का घाट पितृपक्ष के दौरान विशेष धार्मिक महत्व रखता है। मान्यता के अनुसार, गया में पिंडदान करने से पहले पुनपुन नदी में स्नान, तर्पण और प्रथम पिंडदान किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु गया पहुंचकर फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और अन्य कर्मकांड करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में पुनपुन नदी को ‘मोक्ष का प्रथम द्वार’ कहा जाता है। गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं में इसे ‘आदिगंगा’ की संज्ञा दिए जाने का भी उल्लेख मिलता है।
भगवान राम और माता सीता से जुड़ी है मान्यता
पुनपुन घाट का महत्व भगवान श्री राम और माता सीता से जुड़ी एक पौराणिक कथा के कारण भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान राम अपने पिता राजा दशरथ के श्राद्ध और पिंडदान के लिए गया की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने गया पहुंचने से पहले पुनपुन नदी के तट पर अपने पूर्वजों के लिए तर्पण किया था। मान्यता है कि भगवान श्री राम ने माता सीता के साथ पुनपुन नदी के किनारे पहला पिंड अर्पित किया। इसके बाद वे गया पहुंचे और फल्गु नदी के तट पर विधि-विधान से पिंडदान किया। इसी वजह से पितृपक्ष के दौरान कई श्रद्धालु अपनी धार्मिक यात्रा पुनपुन नदी से शुरू करते हैं और इसके बाद गया जाकर पिंडदान की परंपरा पूरी करते हैं।
पुनपुन नदी को लेकर क्या हैं धार्मिक मान्यताएं?
पुनपुन नदी को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि यहां स्नान करने और पितरों के लिए तर्पण करने से पूर्वजों का उद्धार होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां किए गए कर्मकांड का पुण्य परिवार की कई पीढ़ियों तक पहुंचता है। इसी मान्यता के चलते पितृपक्ष में श्रद्धालु पुनपुन नदी के तट पर स्नान, तर्पण और प्रथम पिंडदान करते हैं। इसके बाद गया जाकर फल्गु नदी के तट पर पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
पितृपक्ष 2026 की प्रमुख श्राद्ध तिथियां
26 सितंबर, शनिवार – पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर, रविवार – प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर, सोमवार – द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर, मंगलवार – तृतीया श्राद्ध, महाभरणी
30 सितंबर, बुधवार – चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर, गुरुवार – षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर, शुक्रवार – सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर, शनिवार – अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर, रविवार – नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर, सोमवार – दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर, मंगलवार – एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर, बुधवार – द्वादशी और मघा श्राद्ध
8 अक्टूबर, गुरुवार – त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर, शुक्रवार – चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर, शनिवार – सर्वपितृ अमावस्या
नोट: पुनपुन नदी, भगवान राम और पिंडदान से जुड़ी बातें धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
टिप्पणी लिखें
बातचीत में शामिल होने के लिए कृपया साइन इन करें।
टिप्पणी करने के लिए साइन इन करेंखाता नहीं है? साइन अप करें