सोनम वांगचुक ने अस्पताल में कैदी जैसा व्यवहार होने का लगाया आरोप
नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया है कि 18 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद उनके साथ "कैदी जैसा व्यवहार" किया गया। 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक का कहना है कि अस्पताल में उनके ऊपर इतनी कड़ी पाबंदियां लगाई गईं कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो उन्हें हिरासत में रखा गया हो।
गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में भर्ती होने के बाद जारी 24 मिनट के वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी। हालांकि, वहां उनके साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह बेहद परेशान करने वाला था।
वांगचुक के अनुसार, उन्हें अस्पताल के कमरे से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी और उनसे मिलने आने वालों पर भी सख्त प्रतिबंध लगाए गए थे। उन्होंने दावा किया कि केवल तीन परिजनों को ही उनके साथ रहने की इजाजत दी गई थी। इतना ही नहीं, उनका मोबाइल फोन और लैपटॉप भी अपने पास रखने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे वे अपने समर्थकों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार वह अपने समर्थकों तक संदेश पहुंचाने के लिए पेपर नैपकिन पर नोट लिखते थे, लेकिन वे नोट भी कथित तौर पर जब्त कर लिए जाते थे। वांगचुक ने अस्पताल के माहौल की तुलना उत्तर कोरिया से करते हुए कहा कि वहां हर गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही थी और वातावरण अत्यधिक प्रतिबंधों वाला था।
वांगचुक ने यह भी दावा किया कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मिलने के बाद भी उन्हें कई घंटों तक सफदरजंग अस्पताल से बाहर नहीं जाने दिया गया। उन्होंने कहा कि मेदांता पहुंचने के बाद भी उनके कमरे के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे और अस्पताल परिसर किसी सैन्य छावनी जैसा प्रतीत हो रहा था। उनका आरोप है कि उनसे मिलने आने वाले लोगों को भी पुलिस की अनुमति लेनी पड़ रही थी।
इस मामले पर वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार, रिसेप्शन, लिफ्ट और आईसीयू के बाहर तक पुलिस तैनात थी। उन्होंने पूछा कि यदि अदालत ने स्पष्ट किया है कि सोनम वांगचुक हिरासत में नहीं हैं, तो फिर इतनी कड़ी सुरक्षा और निगरानी किस आधार पर की जा रही थी।
सोनम वांगचुक ने 28 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए, शिक्षा व्यवस्था में सुधार किए जाएं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।
उन्होंने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त किया, जब केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों की कुछ प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, सरकार ने भरोसा दिलाया कि 'संसद चलो' मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा, संसद में परीक्षा सुधार और पेपर लीक के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा होगी तथा नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जाएगा।
सोनम वांगचुक के इन आरोपों के बाद देशभर में नागरिक स्वतंत्रता, प्रदर्शनकारियों के अधिकार और सार्वजनिक आंदोलनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। हालांकि, इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक दिल्ली पुलिस, सफदरजंग अस्पताल या अन्य संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
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