नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अनुपस्थिति एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई। लगातार दूसरे वर्ष दोनों वरिष्ठ कांग्रेस नेता इस समारोह में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर निशाना साधा।भाजपा नेताओं ने राहुल गांधी और खड़गे की गैरमौजूदगी को स्वतंत्रता दिवस समारोह का अनादर बताया। वहीं कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया है।
Congress Defends Leaders Over Absence
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कुछ लोगों को हर बात में अपमान दिखाई देता है। उन्होंने भाजपा के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान न देने वाले लोग आज देशभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने की कोशिश कर रहे हैं।खेड़ा ने कहा, “जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, उन्हें हर चीज में अपमान नजर आता है। स्वतंत्रता दिवस पर कौन आया और कौन नहीं आया, इसे राजनीतिक मुद्दा बनाना उचित नहीं है।”
BJP Questions Rahul Gandhi's Absence
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की अनुपस्थिति को लेकर भाजपा नेताओं ने सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि देश के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों में विपक्ष के प्रमुख नेताओं की मौजूदगी होनी चाहिए।गौरतलब है कि वर्ष 2025 में भी राहुल गांधी और खड़गे स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए थे। हालांकि, वर्ष 2024 में राहुल गांधी लाल किले पर आयोजित कार्यक्रम में मौजूद रहे थे। उस समय उनकी सीट व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक बहस छिड़ गई थी।
Political Debate Intensifies
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए इस तरह के मुद्दे राजनीतिक बहस का हिस्सा बनते रहेंगे। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजनों में नेताओं की मौजूदगी और अनुपस्थिति को लेकर अक्सर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करते रहे हैं।इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए ‘विकसित भारत 2047’, महिला आरक्षण, शिक्षा सुधार, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत जैसे विषयों पर जोर दिया।
राहुल गांधी और खड़गे की अनुपस्थिति को लेकर जारी विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। कांग्रेस इसे अनावश्यक राजनीतिक मुद्दा बता रही है, जबकि भाजपा इसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम से दूरी के रूप में पेश कर रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चाओं में बना रह सकता है।
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