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विश्व के प्रथम त्रि-आयामी गीत–महाग्रंथ "मैं भूख हूँ" का पोस्टर एवं आधिकारिक वीडियो ट्रेलर लोकार्पित

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विश्व के प्रथम त्रि-आयामी गीत–महाग्रंथ "मैं भूख हूँ" का पोस्टर एवं आधिकारिक वीडियो ट्रेलर लोकार्पित • Source: Dr. Avnish Rahi
Source : Dr. Avnish Rahi

मुख्य बिंदु

  • विश्व के प्रथम त्रि-आयामी गीत–महाग्रंथ "मैं भूख हूँ" का पोस्टर एवं आधिकारिक वीडियो ट्रेलर लोकार्पित पर विस्तृत जानकारी और ताज़ा अपडेट।
  • सरकारी अधिकारियों और ज़मीनी संवाददाताओं के मुख्य बयान।
  • ऐतिहासिक संदर्भ और बाज़ार/सामाजिक प्रभाव का विश्लेषण।
  • नीचे पूरा विस्तृत विवरण पढ़ें।

अलीगढ की धरती ने रचा इतिहास

समकालीन हिन्दी साहित्य ने आज एक ऐतिहासिक साहित्यिक उपलब्धि का साक्ष्य प्राप्त किया, जब प्रख्यात गीतकार, साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. अवनीश राही की बहुप्रतीक्षित युग–काव्य–संहिता "मैं भूख हूँ" (रोटी से राष्ट्र तक की वेदना) का आधिकारिक पोस्टर एवं वीडियो ट्रेलर एक गरिमामय प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकार्पित किया गया।

इस अवसर पर डॉ. अवनीश राही ने ग्रंथ की वैचारिक पृष्ठभूमि, उसकी सृजन-यात्रा तथा उसके अभिनव त्रि-आयामी स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कृति केवल कविताओं या गीतों का संग्रह नहीं, बल्कि मनुष्य, समाज और राष्ट्र के अंतःसंबंधों पर केंद्रित एक व्यापक साहित्यिक संवाद है। इस युग–काव्य–संहिता में "भूख" को केवल अन्न के अभाव के रूप में नहीं, बल्कि मनुष्य की गरिमा, श्रम, संवेदना और राष्ट्र की नैतिक चेतना के केंद्रीय प्रश्न के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है।

लगभग 300 पृष्ठों में विस्तृत यह युग–काव्य–संहिता 71 काव्यों की एक अखंड वैचारिक यात्रा है। इसकी रचना-संरचना में 71 युग–शिलालेख, 71 भूख–संवादिनी सूत्र तथा 71 कवि–कथन समाहित हैं, जो इसे पारंपरिक काव्य-संग्रह से अलग एक समग्र साहित्यिक संरचना प्रदान करते हैं।


इस महाग्रंथ की सबसे विशिष्ट विशेषता इसका त्रि-आयामी स्वरूप है। प्रत्येक रचना के साथ एक विशेष QR Code दिया गया है, जिसके माध्यम से पाठक उसी काव्य को स्वयं कवि के स्वर में सुनने के साथ-साथ उसके दृश्यात्मक प्रस्तुतीकरण का भी अनुभव कर सकता है। इस प्रकार यह कृति पठनीय, श्रवणीय और दर्शनीय—तीनों रूपों में साहित्य का एक समन्वित अनुभव प्रस्तुत करती है।

इसी अभिनव साहित्यिक संरचना के कारण "मैं भूख हूँ" को विश्व के प्रथम त्रि-आयामी गीत–महाग्रंथ के रूप में *गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान की गई है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान "मैं भूख हूँ" का आधिकारिक पोस्टर एवं वीडियो ट्रेलर पूर्व विधायक एवं मुख्य अतिथि विवेक बंसल, कार्यक्रम अध्यक्ष महाकवि अमर सिंह राही, माइंड ट्रेनर रोहिताश कुमार विक्की, शिक्षाविद् विशाल कुमार तथा गीत–महाग्रंथ के रचयिता डॉ. अवनीश राही द्वारा संयुक्त रूप से लोकार्पित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने इस कृति को हिन्दी साहित्य में नवाचार, तकनीक और मानवीय संवेदना के अद्वितीय समन्वय का महत्त्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए समकालीन हिन्दी साहित्य की उल्लेखनीय उपलब्धि माना। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व विधायक एवं एमएलसी विवेक बंसल ने कहा कि डाॅ0 अवनीश राही अलीगढ़ के साहित्यिक गहवारे की परम्परा में महाकवि नीरज जी की तरह ही साहित्यक की परम्परा को समृद्ध करेंगे। साहित्य से लेकर सिनेमा तक अपनी अमूल्य रचनाओं से अद्वितीय मुकाम हासिल करेंगे। उन्होंने कहा कि डाॅ0 राही जी द्वारा रचित गीत महाग्रंथ ‘मैं भूख हूॅ। रोटी से राष्ट्र तक वेदना’ रचना समसामयिक एवं प्रासंगिक है। भूख के मानवीय व संवेदनशील पहलूओं को रेखांकित करती है तथा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। 

अपने संबोधन में डॉ. अवनीश राही ने कहा—

भूख जब शब्द बनती है, साहित्य जन्म लेता है।

भूख जब संवेदना बनती है, मनुष्यता जागती है।

भूख जब चेतना बनती है, राष्ट्र बदलता है।

"मैं भूख हूँ" उसी यात्रा का काव्य है।

यदि यह युग–काव्य–संहिता पाठकों को अपने अंतःकरण से संवाद करने और अपने समय के प्रति अधिक उत्तरदायी बनने की प्रेरणा दे सके, तो मैं अपनी साहित्य-साधना को सार्थक मानूँगा।"

प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि इस महाग्रंथ का प्रकाशन हबहॉक्स नुवॉइस प्रेस द्वारा किया गया है, जबकि इसका वैश्विक वितरण पेंगुइन रैंडम हाउस कर रहा जा रहा है।

उपस्थित साहित्यकारों, शिक्षाविदों, पत्रकारों एवं बुद्धिजीवियों ने इस अभिनव साहित्यिक प्रयोग का स्वागत करते हुए इसे हिन्दी साहित्य में तकनीक, सृजनशीलता और मानवीय संवेदना के समन्वय की एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

"मैं भूख हूँ" केवल एक गीत–महाग्रंथ नहीं, बल्कि समकालीन भारत की संवेदना, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय चेतना का एक सशक्त साहित्यिक दस्तावेज़ है। शब्द, स्वर और दृश्य के त्रि-आयामी समन्वय के माध्यम से यह कृति कविता को पृष्ठों की सीमाओं से आगे ले जाकर एक जीवंत अनुभव में रूपांतरित करती है। इस दृष्टि से यह महाग्रंथ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि हिन्दी साहित्य में नवाचार, संवेदना और तकनीक के समन्वित भविष्य की एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इस अवसर पर देवराज सिंह, एडवोकेट, गायक कलाकार विनय कुमार, और शिव कुमार का सहयोग सराहनीय रहा।

TAGS: MainBhookhHoon DrAvnishRahi YugaKavya HindiLiterature BookLaunch
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Nitin

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प्रकाशित तिथि: 05 Aug 2026
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